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भारत का मौद्रिक घाटा 775 अरब ही रहेगा

नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था किस तेजी से सशक्त होती जा रही है इसका एक और प्रमाण। जारी वित्त वर्ष में लगातार कम होते जा रहे मौद्रिक घाटे से इसके 19.7 अरब डॉलर (775.900 अरब रुपए) तक सीमित रहने की उम्मीद बढ़ी है। साथ ही उसकी विकास दर के 9 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है।

आधिकारिक डॉटा के अनुसार नवंबर में देश की अर्थव्यवस्था बढ़कर एक खरब रुपए की हो गई थी। सरकार ने मार्च 2008 तक वार्षिक मौद्रिक घाटे के कुल सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले 3.3 प्रतिशत रहने का लक्ष्य निर्धारित किया था। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत इस लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहेगा।

घरेलू रेटिंग एजेंसी के प्रमुख विश्लेषक डीके जोशी नॆ कहा कि करों के जरिए प्राप्त राजस्व में हुई भारी बढ़ोतरी के कारण इस बार बेहतर मौद्रिक परिणामों की उम्मीद है। राजस्व घाटे के कम रहने से सरकार की खर्च क्षमता में इजाफा होगा।

सरकार की ओर से गुरुवार को जारी बयान में कहा गया है कि मौद्रिक घाटा दिसंबर की समाप्ति पर निर्धारित लक्ष्य 1.51 ट्रिलियन रुपए की तुलना में 51 प्रतिशत ही था। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2007-08 में कुल खर्च के 4.74 ट्रिलियन और आय के 3.97 ट्रिलियन रहने क अनुमान लगाया था। इस लिहाज उसे मौद्रिक घाटे के 775.78 अरब रुपए रहने की उम्मीद थी।

दिसंबर में कंपनियों से अग्रिम कर के रूप में मिली 2.96 ट्रिलियन रुपए की राशि ने उसकी इन उम्मीदों को पुख्ता कर दिया।





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