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टाटा केम ने अमेरिकी सोडा एश कंपनी खरीदी

मुंबई: टाटा केमिकल्स गुरुवार को दुनिया की नंबर दो सोडा एश कंपनी बन गई। इसने अमेरिका की जनरल केमिकल इंडस्ट्रियल प्राडक्ट्स को एक अरब डॉलर में खरीद लिया है।

जीसीआईपी ऋणमुक्त कंपनी है, जो 25 लाख टन सोडा एश बनाती है। सोडा एश का इस्तेमाल ग्लास व डिटर्जेट बनाने में होता है। टाटा केमिकल्स भी नमक, सोडा एश, उर्वरक, सोडियम बाइकाबरेनेट और सीमेंट बनाती है।

दिसंबर 2005 में टाटा केमिकल्स ने ब्रूनर मांड ग्रुप का अधिग्रहण किया था। उसके बाद टाटा केम की सोडा एश निर्माण क्षमता 30 लाख टन हो गई थी। अंतरराष्ट्रीय सोडा एश बाजार में 8 फीसदी हिस्सेदारी हो गई है। विश्लेषक चिंतन मेहता का कहना है कि लागत कम करने के लिए अधिग्रहण किया गया है। इससे 50 फीसदी लागत घट जाएगी और मार्जिन सुधर जाएंगे।

एम्के शेयर्स के रोहन गुप्ता का कहना है कि टाटा केमिकल्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में 15 फीसदी हिस्सेदारी होगी। उद्योग के लिए अच्छा संकेत है कि 55 फीसदी उत्पादन क्षमता केवल तीन कंपनियों के पास होगी। इससे कीमतों में स्थिरता लाने में मदद मिलेगी।

टाटा केम के एमडी होमी आर खुसरोखान का कहना है कि यह टाटा केम की कोरस है। इससे टाटा को उत्तरी अमेरिका, लैटिन अमेरिका और सुदूर पूर्व तक का बाजार मिल जाएगा।

एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसीडेंट आर मुकुंदन का कहना है कि जीसीआईपी का अभी कारोबार 40 करोड़ डॉलर या 1600 करोड़ रुपए का है। सोडा एश का बाजार अभी 4.3 करोड़ टन है और घरेलू बाजार 25 लाख करोड़ टन का है। भारत का बाजार हर साल 6 फीसदी बढ़ रहा है।





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