जयपुर. ‘चैनल वी’ सुपर सिंगर रवींद्र उपाध्याय शनिवार को अपने चहेतों से रूबरू हुए, लेकिन अलग ही अंदाज में। आज के कार्यक्रम में न पॉप संगीत का शोर-शराबा था और न ही वाद्य यंत्रों की झंकार। रवींद्र के हाथों में था हारमोनियम और साथ में तबले और गिटार की संगत। उनका यह कार्यक्रम जवाहर कला केंद्र और दर्शक संस्था के तत्वावधान में आयोजित किया गया।
इसमें रवींद्र, दर्शक संस्था के निदेशक राजीव भट्ट और सिंथेसाइजर वादक अवनीश गोस्वामी ने विभिन्न सांगीतिक प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले कलाकारों को स्टूडियो और लाइव परफारमेंस में अंतर, पाश्र्वगायन की कला, आवाज की टोनल क्वालिटी बनाए रखने तथा स्टेज कंट्रोल सहित प्रतियोगिताओं के लिए जरूरी कई बातें समझरई।
उन्होंने राजीव भट्ट से ही मंच से कई सवालों के जरिए वहां उपस्थित कलाकारों को बताया कि अच्छी आवाज के लिए कलाकार को ‘खरज’ से लेकर ‘तार सप्तक’ के स्वरों पर नियमित रूप से अभ्यास करना चाहिए।
उन्होंने इस अवसर पर अपनी पहली फिल्म ‘इकबाल’ का गीत ‘आंखों में सपना, सपनों में आशा, आशा है जिंदगी’, पंजाबी गीत ‘खत टुकड़े-टुकड़े कर देने मैं’ और गजल ‘साकिया जाएं कहां हम तेरे मैखाने से’ सुनाकर कलाकारों का मनोरंजन किया। इससे पूर्व संस्था की समन्वयक प्रोमिला राजीव और शंकर कन्नोजिया ने कलाकारों का अभिनंदन किया।