जयपुर. राज्य के चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग ने पुरुषों को आरक्षण दे दिया है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत 1500 नियुक्तियों में सामान्य वर्ग को बाकायदा पुरुषों का बताकर आरक्षित किया गया। विभाग की ओर से जारी की गई कट ऑफ मार्क्स की सूची में भी पुरुषों की अलग सूची तैयार हुई है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार के निर्देश पर हाल ही में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों ने जिला ग्रामीण स्वास्थ्य समितियों के सदस्य सचिव के नाते 600 आयुर्वेद चिकित्सकों, 100 होम्योपैथिक चिकित्सकों और 50 यूनानी चिकित्सकों तथा 750 आयुर्वेदिक नर्स कंपाउंडरों की अनुबंध पर भर्ती में सामान्य वर्ग के पद तो पुरुषों के लिए आरक्षित कर दिया, वहीं एससी, एसटी और ओबीसी के पदों पर भी महिला आरक्षण के अलावा अन्य पदों को पुरुषों के लिए आरक्षित मानकर भर्ती की गई है।
किन जिलों में गड़बड़ी : बूंदी, दौसा, सीकर, झालावाड़, सवाई माधोपुर, जैसलमेर सहित कुछ जिलों को छोड़कर बाकी जिलों में भारी गड़बड़ी हुई है। भीलवाड़ा, करौली, झुंझुनूं, डूंगरपुर, टोंक, बाड़मेर, भरतपुर आदि जिलों में पुरुषों और महिलाओं की अलग सूचियां बनी हैं।
टोंक ने तो दुबारा जारी की सूची : टोंक जिले में पहले 26 दिसंबर 07 को और बाद में संशोधित सूची 28 दिसंबर 07 को जारी हुई।
चूक क्यों हुई?
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सिंतबर 07 में शुरू हुई इस भर्ती प्रक्रिया के दौरान यह चूक इस मानसिकता के कारण हुई है कि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के अलावा अन्य सीटों को पुरुष वर्ग के लिए आरक्षित मान लिया गया।
होना यह चाहिए कि जो बाकी 70 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित नहीं है उन पर भी महिलाएं तो आ ही सकती हैं। विभाग की चूक के कारण महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत सीटें ही रह र्गई और बाकी 70 प्रतिशत में उनकी हिस्सेदारी नहीं रही।
सिद्धांत क्या है? : आरक्षण के बारे में सिद्धांत रेलगाड़ी के डिब्बे की तरह है। महिला डिब्बे में सिर्फ महिला ही सवार हो सकती है, लेकिन जनरल कंपार्टमेंट महिला-पुरुष दोनों के लिए होता है।
अफसर चूक नहीं मानते
पुरुष आरक्षण को लेकर राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के परियोजना निदेशक केके गुप्ता से बातचीत
सवाल : ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत अनुबंध पर कितनी भर्ती की गई?
गुप्ता : प्रदेश के सभी 32 जिलों में भर्ती की गई। 750 डॉक्टर थे और इतने ही र्न्िसग कंपाउंडर।
क्या इस भर्ती में पुरुष वर्ग के लिए आरक्षण रखा गया है?
होता ये है कि सामान्य वर्ग की सीटों को पुरुष वर्ग के लिए आरक्षित मान लिया जाता है।
यह तो पुरुष वर्ग के लिए आरक्षण ही हुआ?
महिलाओं के लिए अलग आरक्षण होने से बाकी सीटें पुरुषों के लिए आरक्षित मान लिया जाता है।
विभाग की ओर से प्रकाशित जानकारी में बाकायदा ‘पुरुष आरक्षित’ लिखा गया है?
कुछ इधर-उधर हो गया होगा।
कट ऑफ मार्क्स में भी पुरुष वर्ग का हवाला क्यों है?
असल में महिलाओं के ‘कट ऑफ मार्क्स’ कम रहते हैं और पुरुषों के ज्यादा।
पुरुषों के लिए आरक्षण नहीं है। इसलिए पुरुष और महिला के रूप में अलग-अलग सूचियां जारी करना गलत है। ऐसा कैसे हो सकता है?
-पवन सुराणा, पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान महिला आयोग
जो पद महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिए वे महिलाओं के, बाकी पद पुरुषों के होते हैं।
-आरके मीणा, प्रमुख सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग