bhaskar Web English
HomeNewsMetrosJaipur Jaipur

बसंत के घर में सर्दी का अतिक्रमण

जयपुर.rain ग्लोबल वार्मिग के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ने का असर गुलाबी नगर में भी दिखाई दे रहा है। इससे सर्दी का पीक समय बदल रहा है। पहले जहां 15 दिसंबर से 15 जनवरी तक सर्दी परवान पर रहती थी, अब इन दिनों तापक्रम बढ़ रहा है। दूसरी ओर फरवरी का पूरा महीना अपेक्षाकृत ‘कूल’ हो गया है। मौसम विभाग के 25 वर्षो के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो यही नतीजे सामने आ रहे हैं। साथ ही इस बीच शहर का तापमान भी लगभग 3 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है।

यूं गर्म हो रहा है शहर : वर्ष 1985 मेंसबसे सर्द दिन 14 जनवरी (5.5 डिग्री) और सबसे गर्म दिन 13 मई (42.8 डिग्री) दर्ज किया गया। दस साल बाद 1995 में साल का सबसे सर्द दिन 2 दिसंबर (6 डिग्री) था। वहीं साल का सबसे गर्म दिन 16 मई (46 डिग्री) दर्ज किया गया। फिर दस साल बाद 2005 में साल का सबसे सर्द दिन 28 दिसंबर (8.0 डिग्री) और सबसे गर्म दिन 24 मई (अधिकतम तापमान 45.5 डिग्री) रहा।

पीक टाइम का बढ़ता तापमान

आमतौर पर सर्दियों का पीक सीजन 15 दिसंबर से 15 जनवरी तक माना जाता है। वर्ष 1981 में एक जनवरी को न्यूनतम तापमान 8.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वर्ष 1996 में 1 जनवरी को तापमान 12 डिग्री और वर्ष 2006 में 20.6 रहा।

इसलिए सटीक नहीं बैठते किस्से!

दिसंबर और जनवरी प्रारंभ तक तो सर्दी कम होने और फरवरी तक इसका प्रकोप रहने से घर-घर चर्चा बनी हुई है। साथ ही मौसम तंत्र के हिसाब से बड़े-बुजुर्ग जो किस्से कहते हैं, उनके मायने बदलने से सभी हैरान हैं।

जैसे ‘पोष खालड़ी कोस’ अर्थात हिंदू महीनों के हिसाब से पौष महीना दिसंबर-जनवरी के बीच आता है, जो सबसे सर्द महीना होता था, जब सर्दी के चरम पर होने से खाल भी खिंच जाती थी। इसी तरह ‘आधे माघ कांधे कांबली’ अर्थात माघ (फरवरी) आते-आते सर्दी कम होने से रजाई दूर होकर कंबल जगह ले लेता था। लेकिन लगता है मौसम तंत्र बदलने से अब नई कहावतें गढ़ने का समय आ गया है।

विशेषज्ञों की नजर में ये हैं कारण

वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ना
पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन
सूर्य की सतह (सूर्य का तूफान) की स्थितियों में बदलाव
अरब सागर से उठने वाले वायु दाब का कम होना
कश्मीर में होने वाले हिमपात का देरी से होना

मौसम तंत्र गड़बड़ाने के कई कारण होते हैं। ग्लोबल वार्मिग अकेला कारक नहीं है। जहां तक जयपुर शहर के तापमान की बात है यहां भी तेजी से बढ़ता औद्योगीकरण, घटते जंगलात भी एक कारक हैं।
-मनोज कुमार पंडित, वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक

अरब सागर से उठने वाला वायु दाब कम हो रहा है। साथ ही जो स्नोफाल पहले दिसंबर-जनवरी में होता था, वह अब देरी से हो रहा है, इससे सर्दी खिसकती जा रही है। जहां तक तापमान बढ़ते जाने की बात है वह ग्लोबल वार्मिग का नतीजा है। जयपुर इन सबसे अछूता नहीं है।
-डॉ. बी.एल. गुप्ता, असिस्टेंट प्रोफेसर, राजस्थान विश्वविद्यालय





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: