जोधपुर. मशहूर गायिका शुभा मुद्गल ने जयनारायण व्यास स्मृति भवन में आयोजित शास्त्रीय संगीत संध्या में अपने अनूठे अंदाज में भजन, ठुमरी व परंपरागत बनारसी कजरी की प्रस्तुति करते हुए श्रोताओं को अभिभूत कर दिया।
राजस्थान संगीत नाटक अकादमी की स्वर्ण जयंती व सांस्कृतिक संस्थान स्वर-सुधा की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित इस संगीत संध्या में खचाखच भरे हॉल में अपनी विशिष्ट शैली में मुद्गल ने कार्यक्रम का आग़ाज राग श्री में एक ताल में निबद्ध अपने ही गुरु रामानुज रचित भजन ‘मन मेरे काहे तूं सोचत, हरि सांवल दाता मेरे सबके सुखधाम’ के साथ किया।
मुद्गल ने इसी राग में रचना ‘सांझ की वेला चंद्र की सवारी ’ के बाद रामानुज की ही रचना ‘आज मन लाग्यो मोरो चतुर चरण पर’ की प्रस्तुति राग छाया नट में की।
निराला अंदाज विशिष्ट गायकी
हॉल के बाहर बूंदाबांदी से सर्द हुए वातावरण को दर्शकों ने मुद्गल के अलाप, गमक तथा प्रस्तुतिकरण की विशिष्ट अदायगी पर बार-बार तालियों की गर्माहट से भर दिया। उन्होंने विनय पंडित की रचना माईरी मनवा मोरा माने मिलन बिना इस अंदाज में प्रस्तुत किया कि श्रोता दाद दिए बिना नहीं रह सके।
ठुमरी व कजरी का दौर
विशुद्ध शास्त्रीय प्रस्तुतियों के बाद मुद्गल ने ठुमरी ‘रतिया नींद न आए-तुम बिन जी घबराए’ की प्रस्तुति कर दर्शकों से वाहवाही लूटी। इसके बाद उन्होंने बनारस घराने में गाई जाने वाली कÊारी ‘सपना देखीला पलकनवा, के पिया घर आए’ सुना कर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। कजरी की प्रस्तुति के दौरान हारमोनियम पर संगत कर रहे सुधीर नायक व तबले पर अनीष प्रधान ने मुद्गल का खूब साथ दिया।
कार्यक्रम का समापन उन्होंने दर्शकों की फरमाईश पर राग भैरवी में परंपरागत ठुमरी सैंया बेदर्दी दरद नहीं जाने के साथ किया। इससे पहले मुख्य अतिथि संभागीय आयुक्त किरण सोनी गुप्ता व अध्यक्षता कर रहे आयकर आयुक्त एसडी चारण ने मुद्गल का स्वागत किया। कार्यक्रम में राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष मदन मोहन माथुर, स्वर सुधा के बीडी जोशी, श्याम सुंदर तथा अनुराधा आडवाणी, पूर्व आईजी जेके बालानी तथा राजेंद्र वैष्णव सहित अनेक संगीत साधक मौजूद थे।