जोधपुर. यदि सब कुछ व्यवस्थित चला तो आगामी अप्रैल महीने में भारतीय ‘चंद्रयान-1’ अपने मिशन के लिए उड़ान भरेगा। पहले चंद्रयान को लांच करने की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। फिलहाल वैज्ञानिकों ने इस बार यान में चांद के धरातल पर उतारने के लिए एक स्थिर उपकरण ही चुना है, लेकिन चंद्रयान-2 में भेजी जाने वाली ‘लूनर बग्घी’ चांद पर चार-पांच किमी का चक्कर लगाएगी।
इस मिशन से जुड़े इसरो के वैज्ञानिक अब 15 फरवरी को आने वाली रिव्यू रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। इस रिपोर्ट के बाद ही यह तय हो पाएगा कि चंद्रयान-1 अप्रैल में कब लांच किया जाए। अपने घर जोधपुर आए मून मिशन का ब्ल्यू प्रिंट तैयार करने वाले अहमदाबाद की भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के प्रो.नरेन्द्र भंडारी ने बताया कि पहला यान (सैटेलाइट) तैयार हो चुका है। इसमें 11 उपकरण लगाए जाने हैं।
चार उपकरण लग चुके हैं, शेष उपकरण इस महीने के आखिर में लग जाएंगे। यह यान दो साल तक चांद की परिक्रमा करेगा। यह अवधि अन्य देशों के सैटेलाइट की तुलना में सर्वाधिक होगी। इस यान में एक उपकरण ‘मून इम्पेक्टर प्रोब’ भी भेजा जा रहा है, जो यान के कक्षा में स्थापित होने के बाद चांद के लिए छोड़ा जाएगा। करीब 20 मिनट में चांद की धरती छूने वाले इस उपकरण से वहां के वातावरण के अध्ययन में मदद मिलेगी।
यह फोटो भी खींचेगा और धरातल की स्थिति के बारे में भी जानकारी एकत्र करेगा। इसके आधार पर चंद्रयान-2 की तैयारियों को नई दिशा दी जाएगी। वर्ष 2012 में प्रस्तावित दूसरे चंद्रयान में ‘लूनर बग्घी’ भेजी जाएगी। यह एक छोटी कार की तरह होगी और चांद की सतह पर चार-पांच किमी घूम सकेगी। बग्घी को चंद्र धरातल पर उतारने के लिए बहुत ही सावधानी बरतनी पड़ेगी और भारतीय वैज्ञानिक इसके लिए ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ तकनीक अपनाने पर विचार कर रहे हैं।
भंडारी ने कहा कि चंद्र अभियान में फिलहाल किसी अंतरिक्ष यात्री को भेजने की योजना नहीं है। यह प्रयास केवल पृथ्वी की उत्पत्ति से जुड़ी जिज्ञासाओं का समाधान करने और कई अनसुलझे रहस्यों से परदा उठाने के लिए है। इसे अनवरत बनाए रखने के लिए चंद्रयान-3 का प्रस्ताव बनाया गया है। इस यान से उम्मीद की जा रही है कि यह चांद के धरातल से नमूने लाएगा।
कहां तक जाएगा चंद्रयान मिशन
पहला यान: प्रथम चंद्रयान में उपकरण ही भेजे जा रहे हैं, जो चांद व पृथ्वी की थाह लेंगे।
दूसरा यान: 2012 में प्रस्तावित दूसरे चंद्रयान में लुनार बग्घी भेजी जाएगी, जो चांद पर उतारी जाएगी।
तीसरा यान: दो चंद्रयानों के नतीजों के आधार पर तैयार होने वाले तीसरे यान का मकसद रहेगा चांद से सेंपल लेने का। यह सेंपल पृथ्वी तक वापस आने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
आगे क्या: तीनों चंद्रयानों के नतीजों को देखते हुए ऐसे ही किसी यान में इंसान को चांद पर भेजने की तैयारी शुरू होगी। हालांकि इसमें अभी कई साल लगने की संभावना है।