जोधपुर. केंद्र सरकार के निर्देश पर तीन दशक पहले पाकिस्तानी बंगालियों को पुनर्वास के लिए प्रताप नगर में निशुल्क आबंटित सरकारी क्वार्टर बिकने की खबर दैनिक भास्कर के 28 जनवरी के अंक में प्रकाशित होते ही जिला प्रशासन ने इसे मामले को गंभीरता से लिया।
जिला कलेक्टर नरेशपाल गंगवार ने इसकी गुप्त जांच कराई तो इसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।इस जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 1977 में बंगालियों को पुनर्वास के लिए प्रताप नगर क्षेत्र में कुल 48 क्वार्टर बना कर निशुल्क आबंटित किए थे, लेकिन शरणार्थी क्वार्टर्राे में रहने वाले बंगाली पैसे की लालच में आकर भू माफिया व क्षेत्रीय लोगों को क्वार्टर बेच रहे हैं । जबकि नियम अनुसार ये मकान न तो कोई बेच सकता है और ना ही कोई खरीद सकता है।
ऐसे ओर भी उदाहरण हैं
प्रतप नगर बंगाली कॉलोनी में मकान नंबर 4 पूनमचंद , गढरा रोड के नाम से आबंटित है। उसने यह मकान पिछले 13-14 वर्ष से गोपाल को 900 रुपए प्रति माह किराए पर दे रखा है। मौका जांच रिपोर्ट में मकान नंबर 27 का अस्तित्व ही समाप्त मिला है। इस क्वार्टर को पड़ोसी मंदोदरी देवी के मकान के साथ मिला हुआ पाया गया है। मकान नं. 30 माता का थान स्थित अंध विद्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सर्वेश्वर विश्वास के नाम से आबंटित है।
सर्वेश्वर ने यह मकान महेंद्र सिंह को बेच दिया है। मकान नं. 19 किशन के नाम से आबंटित है तथा यह संजीत मजूमदार को बेचा गया है। मकान नंबर 37 में मनमोहन नाम का बोर्ड लटक रहा है। यह मकान महेश राम से खरीदना बताया जाता है। वहीं जांच अधिकारी को क्वार्टर संख्या 9 व 16 मौके पर खाली मिले हैं। क्वार्टर नंबर 47 को ज्ञान प्रापर्टी डीलर द्वारा खरीदना बताया गया है।
क्षेत्रीय लोगों ने खोली पोल
कलेक्टर गंगवार को क्षेत्रीय लोगों ने लिखित में सूचना दी थी कि प्रताप नगर के बंगाली क्वार्टर्स भू माफिया के नजर में चढ़ गए हैं। लालच में आकर बंगाली दो-दो लाख में अपने मकान बेच रहे हैं।
क्वार्टर बेचने एवं खरीदने वाले दोनों पक्षों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि पुर्नवास के दौरान मिले ये सरकारी क्वार्टर्स भू-माफिया के हत्थे न चढ़े। क्षेत्रीय लोगों ने आशंका जताई थी कि पाक से आए बंगाली इसी तरह सरकारी क्वार्टर्स बेच कर चले गए तो कौन सा पाकिस्तानी कहां चला गया। इससे सरकार व प्रशासन के सामने समस्या खड़ी हो सकती है।