भोपाल. शहर की व्यस्ततम सड़क पर 40 घंटे से ज्यादा समय तक नियमों का सरेआम उल्लंघन, यातायात की बदहाली, प्रशासन का इसे नजरअंदाज करने वाला रवैया और सरकार की चुप्पी। राजधानी संभवत: ऐसा नजारा पहली बार देख रही है। इससे लोग परेशान हैं, उन्हें परेशान करने वाले बेखौफ नजर आ रहे हैं और परेशानी को दूर करने के लिए जिम्मेदार अफसर सरकारी आदेश के इंतजार में हाथ बांधे खड़े हैं।
बात हो रही है, टीनशेड पर चल रहे गुरुजियों के आंदोलन की। उच्च न्यायालय भले ही चक्काजाम पर रोक लगा चुका हो, लेकिन टीनशेड की सड़क पर शुक्रवार की दोपहर दो बजे से अब तक डटे हुए आंदोलनकारी इस व्यवस्था से अप्रभावित नजर आते हैं।
उन पर कार्रवाई के नाम पर प्रशासन ने इसी सड़क को ‘जेल’ घोषित कर दिया है। पुलिस और प्रशासन के आला अफसर, वज्र वाहन और कार्रवाई के लिए तैयार भारी-भरकम अमला बस चुपचाप यह सब देख रहा है। किसी ने यह प्रयास तक नहीं किया कि आंदोलन करने वालों को सड़क से हटाकर टीनशेड चौराहे पर कर दिया जाए, ताकि वहां का बंद यातायात फिर से शुरू हो सके।
जनता की परेशानी
माता मंदिर, जैन मंदिर, टीटी नगर कम्युनिटी हाल, कमला नेहरू स्कूल, लिंक रोड से लेकर न्यू मार्केट से टीन शेड जाने वाला मुख्य मार्ग बंद है। चारों ओर बैरिकेड लगे हुए हैं। यह व्यस्ततम सड़क शहर के अनेक हिस्सों को एक-दूसरे से जोड़ती है।
नए और पुराने भोपाल की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा रेलवे स्टेशन सहित हमीदिया अस्पताल, न्यू मार्केट, वल्लभ भवन, सतपुड़ा और विंध्याचल सहित जिला न्यायालय तक जाने के लिए इसी मार्ग का इस्तेमाल करता है। ऐसे में तीन दिन से बंद पड़े इस मार्ग से जनता को हो रही तकलीफ आसानी से समझी जा सकती है।
मार्ग परिवर्तित होने से जहां लोगों को अधिक समय और पेट्रोल खर्च करना पड़ रहा है, वहीं सिटी बस से सफर करने वालों की तकलीफ भी बढ़ गई है। माता मंदिर और न्यू मार्केट से टीन शेड की ओर आने वाली बसें अब लंबा चक्कर घूम कर जाती हैं। टीन शेड जाने वाले मुसाफिरों को एक से दो किलोमीटर दूर उतारा जा रहा है।
क्यों चुप है सरकार?
इस स्थिति से परेशान कई शहरी अब सवाल उठा रहे हैं कि सरकार इस मसले पर चुप्पी क्यों साधे हुए है? छात्र परेश ललवानी कहते हैं कि जनता की परेशानी कोई समझ ही नहीं रहा है। जबकि अब तक या तो आंदोलनकारियों की मांग मान ली जानी चाहिए या फिर उन्हें सड़क से हटाया जाना चाहिए। बंद मार्ग से अपना वाहन वापस करते हुए गुस्साए सुरेंद्र सिंह सवाल उठाते हैं ‘आखिर ऐसा कब तक चलेगा’?
सिर्फकुछ मामले दर्ज
एडीएम रजनीश श्रीवास्तव का कहना है कि प्रशासन ने नियम तोड़ने वाले कुछ गुरुजियों पर कार्रवाई की है। उन पर नजर रखने के लिए आंदोलन स्थल की वीडियोग्राफी कराई जा रही है। उनका तर्क है कि पकड़े गए गुरुजी अपना सही नाम नहीं बताते, इसके चलते उन पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
एसपी जयदीप प्रसाद ने भास्कर को बताया कि मार्ग रोकने के मामले में कुछ प्रकरण दर्ज किए गए हैं। यदि आंदोलनकारी कानून-व्यवस्था बिगाड़ते हैं तो उन पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।