अजमेर. राजस्थान लोक सेवा आयोग में पिछले चार साल में राज्य सरकार भारतीय प्रशासनिक सेवा के सात अफसरों को तैनात कर चुकी है। कोई भी अफसर इतने अर्से तक रह ही नहीं पाया कि आयोग की कार्य प्रणाली में बड़ा परिवर्तन करने की सोच पर अमल कर सकता। लिहाजा किश्तों में सुधार के काम चलते रहे।
आयोग में अब तक सरकार भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसरों को ही सचिव के पद पर तैनात करती रही है। वर्ष 2003 में सरकार ने सचिव की तैनाती नहीं की, लिहाजा उप सचिव किशनलाल घारू को ही लंबे समय तक सचिव का काम करना पड़ा। हालत यह हो गई कि आरएएस भर्ती परीक्षा और थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा घारू के जरिए ही संचालित हुई।
इसके बाद सरकार ने एक के बाद एक सात अफसरों की तैनाती कर डाली। यादराम गौर, सीपी व्यास, आर. एन. अरविंद, आर. एस. अग्रवाल थोड़े-थोड़े समय के लिए तैनात हुए और हटा दिए गए। राजेन्द्र भाणावत की तैनाती हुई जिनके निर्देशन में शिक्षक भर्ती परीक्षा हुई। वे भी आयोग की कार्य प्रणाली में भारी परिवर्तन का प्लान तैयार कर ही रहे थे कि हटा दिए गए और रमेश कुमार जैन को लगा दिया गया।
जैन करीब दस माह रहे। उनके कार्यकाल में रिकॉर्ड भर्ती और रिकॉर्ड डीपीसी हुई। वे आयोग की संपूर्ण कार्य प्रणाली को ऑन लाइन करना चाहते थे। सरकार से योजनाओं को मंजूर भी करवा लिया, लेकिन अब हटा दिए गए। उनके स्थान पर विकास सीताराम भाले को तैनात किया गया है, जो राज्य सरकार के पांचवें वर्ष में आठवें सचिव होंगे।
बिजनेस एक्सपर्ट और टेक्नोक्रेट
सरकार ने आयोग के सचिव रमेश कुमार जैन की जगह बांसवाड़ा कलेक्टर विकास सीताराम भाले की नियुक्ति कर दी है। इसी प्रकार बाड़मेर के कलेक्टर सुबीर कुमार को राजस्व मंडल के निबंधक पद पर तैनात किया गया है।
विकास सीतारामजी भाले
अजमेर में प्रशिक्षु रहे विकास भाले इन्टरेनेशनल बिजनेस में स्नातकोत्तर और 1999 बैच के आइएएस हैं। बांसवाड़ा में कलेक्टर पद से पहले विकास आइइसी (मेडिकल), प्रारंभिक शिक्षा एवं डीपीइपी म डाइरेक्टर, दौसा कलेक्टर, जिला परिषद् जयपुर में सीइओ एवं गुलाबपुरा, गंगापुर एवं माउंट आबू में एसडीएम रह चुके हैं।
सुबीर कुमार
बिहार के मूल निवासी सुबीर कुमार मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीई एवं 1998 बैच के अफसर हैं। बाड़मेर से पहले वे डूंगरपुर में कलेक्टर, वित्त महकमे में उपसचिव, उदयपुर जिला परिषद् में सीइओ एवं प्रतापगढ़ में एसडीएम रह चुके हैं।