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पेराफेरी गांवों में आवास भत्ता

अजमेर. राज्य सरकार ने अजमेर के पेराफेरी गांवों में कार्यरत शिक्षकों और राज्य कर्मचारियों को भी शहरी सीमा में मानते हुए 15 प्रतिशत आवास भत्ता देने का निर्णय किया है। सरकार के निर्देश पर जिला कोषालय ने कर्मचारियों को बढ़े हुए आवास भत्ते की दर से बिल पास करना शुरू कर दिया है।

जिला कोषालय ने अजमेर तहसील के 33 और पीसांगन तहसील के 2 गांवों को 4 अप्रैल 05 से अजमेर शहरी सीमा में मानते हुए वहां कार्यरत शिक्षकों और राज्य कर्मचारियों को अजमेर 15 प्रतिशत आवास भत्ता देने की अनुशंसा की थी। मामला लंबे समय से मुख्यालय और सरकार के समक्ष विचाराधीन था।

24 जनवरी को जनसुनवाई में मामला सामने आने पर सीएम ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। वित्त विभाग ने पेराफेरी और आस-पास के 35 गांवों के कर्मचारियों को अजमेर शहर में कार्यरत राज्य कर्मचारियों के समान आवास भत्ता देने के आदेश दिए हैं।

वित्त विभाग के आदेश पर कोषालय ने जनवरी माह के वेतन के साथ कर्मचारियों को बढ़ी हुई दर से आवास भत्ते के बिल पास करने की कवायद शुरू कर दी है। उल्लेखनीय है कि अब तक इन गांवों के कर्मचारियों को ग्रामीण क्षेत्र की दर से पांच प्रतिशत आवास भत्ता मिल रहा था।

एरियर भुगतान का प्रस्ताव भेजा

जिला कोषाधिकारी राजेंद्र सिंह पंवार ने गांवों के राज्य कर्मचारियों और शिक्षकों को 4 अप्रैल 05 से 15 प्रतिशत आवास भत्ता देने की अनुशंसा करते हुए बकाया एरियर के भुगतान की अनुमति मांगी है।

निगम में शामिल नहीं होंगे..

नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री सुरेंद्र गोयल ने आश्वस्त किया है कि पेराफेरी गांवों को नगर निगम की सीमा में शामिल नहीं किया जाएगा। शनिवार को जिला परिषद सदस्य श्रवण सिंह रावत के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों का प्रतिनिधि मंडल गोयल से मिला।

जनप्रतिनिधियों ने पेराफेरी के 18 गांवों को निगम में शामिल नहीं करने की मांग की। रावत के अनुसार गोयल ने उन्हें आश्वस्त किया है कि गांव निगम में शामिल नहीं किए जाएंगे। इस संबंध में उन्होंने सुझाव सीएम को भी दे दिया है। इस अवसर पर घनश्याम जांगिड़ और शंकर सिंह रावत आदि भी मौजूद थे।





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