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ध्रुपद की कल्पनाशील उड़ान, सितार की मधुर तानें

इंदौर. युवा गायक कमलेश तिवारी के कल्पनाशील ध्रुपद गायन से रवींद्र नाट्यगृह में उस्ताद अमीर खां समारोह का आगाज हुआ। उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी और लोक संस्कृति मंच के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में रीवा के युवा कलाकार कमलेश ने शुरुआत राग भोपाली से की। उन्होंने आलाप, जोड़ और झाला में दमदार मुर्की और गमकभरी तानों से भरा हरिओम अनंत नारायण का गान किया।

चौताल में सजी उनकी नारायण वंदना तू ही सूर्य तू ही चंद्र गायकी की अनूठी तैयारी लिए हुए था। पंडित उमाकांत-रमाकांत गुंदेचा के शिष्य कमलेश ने शूल ताल में निबद्ध रचना शंकर सुत गणोश विघ्न विनाशन गौरी नंदन में द्रुतगति की तानों से श्रोताओं को प्रभावित किया। राग मालकौंस में निबद्ध रचना शंकर गिरिजापति पार्वती पतेश्वर.. के साथ ही कार्यक्रम का समापन किया।

उनके साथ पखावज पर वरिष्ठ कलाकार लक्ष्मीनारायण पवार ने और तानपुरे पर सपना पोटधन ने संगत की। कार्यक्रम के दूसरे चरण में मुंबई के पंडित नयन घोष का सितार वादन हुआ। ख्यात तबलावादक पद्मभूषण निखिल घोष के पुत्र और शिष्य नयन ने सितार की शिक्षा उनके पिता से ही ली। वे ख्यात बांसुरीवादक पंडित पन्नालाल घोष से भी शिक्षा ले चुके हैं।

उन्होंने राग गावती (जिसे कभी राग गायत्री भी कहा जाता था) के साथ शुरुआत की। गमकभरी तानों के साथ आलापचारी से राग का स्वरूप निखारते हुए उन्होंने जोड़ झाला बजाया और तीन ताल में विलंबित और द्रुत गति में मिठासभरे वादन से श्रोताओं को रससिक्त कर दिया।

मीठे सितार वादन की अगली पेशकश में उन्होंने कजरी सुनाई और गायन में पारंगत नयन ने बाउल संगीत की रचना गुरु तोमार चोरोण पोरबो.. गाकर सुनाई। उनके साथ इंदौर के युवा तबलावादक हितेंद्र दीक्षित ने शानदार संगत की। हितेंद्र ने दाएं और बाएं के सुंदर समागम से वादन में निखार लाया। चपल वादन के साथ उनकी चक्करदार लड़ियां मोहित करने वाली रहीं।

कार्यक्रम की शुरुआत में लोक निर्माण मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, लोक संस्कृति मंच के शंकर लालवानी, अकादमी के निदेशक अरुण पलनीटकर और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति उमरावसिंह चौधरी ने मिलकर उस्ताद अमीर खां साहब के चित्र पर माल्यार्पण किया व दीप प्रज्‍जवलन किया। अतिथियों का स्वागत शंकर लालवानी व अरुण पलनीटकर ने किया।

रविवार को शाम 7 बजे से गिरीडीह के मोर मुकुट केड़िया एवं मनोजकुमार केड़िया सितार और सरोद पर जुगलबंदी पेश करेंगे। उसके बाद कार्यक्रम का समापन पुणो के विजय सरदेशमुख के गायन से होगा।





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