बीकानेर. पूरे मानदंड होने के बावजूद बीकानेर को नगर निगम का दर्जा नहीं देने के विरोध में अब बीकानेर की विपक्षी राजनीति गर्मा गई है। अजमेर को नगर निगम की सौगात देने के बाद तो यहां आंदोलनों की झड़ी लग गई है। शनिवार को शहर कांग्रेस ने कलेक्टरी पर धरना दिया तथा नगर निगम घोषित न करने पर बड़े जन आंदोलन की चेतावनी दी।
आंदोलन का माध्यम तलाश रही कांग्रेस को वसुंधरा राजे सरकार ने एक मुद्दा बैठे बिठाए पकड़ा दिया है। बीकानेर ने निगम के मानदंड पांच साल पहले ही पूरे कर लिए थे। जनसंख्या का आंकड़ा पार करने की रिपोर्ट भी राज्य सरकार के पास पहुंच गई थी। भाजपा ने अपने चुनावी अभियान में नगर निगम बनाने का वादा भी कर लिया।
इन सबके बाजवूद बीकानेर से पहले अजमेर को नगर निगम बनाने की घोषणा ने यहां की राजनीति को गर्म कर दिया। भाजपा इस मसले में बैकफुट पर आ गई है और उसके नेता बयान देने से कतरा रहे हैं। कांग्रेस ने शनिवार को अपनी पूरी ताकत लगा इस स्थानीय मुद्दे पर कांग्रेसजनों को लामबंद किया।
कलेक्टरी पर जुटे कांग्रेसजनों को संबोधित करते हुए पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व नगर विधायक डॉ. बी.डी.कल्ला ने कहा है कि मापदंडों पर खरे बीकानेर को नगर निगम का दर्जा नहीं देकर मुख्यमंत्री वसुंधराराजे ने सौतेला व्यवहार किया है जिसे बीकानेर की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने अपनी ओछी मानसिकता का आखिरकार परिचय दे ही दिया है और इससे यह भी जाहिर हो गया है कि इस शहर के प्रति सरकार की क्या सोच है। सरकार ने अगर जल्दी ही फैसला नहीं किया तो कांग्रेस न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेगी। शहर कांग्रेस अध्यक्ष जनार्दन कल्ला ने इस मौके पर कहा कि बीकानेर की जनता शांतिप्रिय है लेकिन अपना हक लेना जानती है।
यह प्रदर्शन गांधीवादी तरीके से किया जा रहा है लेकिन जनता अपने हक के लिए आंदोलन को तेज भी कर सकती है। नगर परिषद सभापति मकसूद अहमद ने कहा कि सरकार का व्यवहार अब सहनशक्ति से बाहर है। बीकानेर में जो भी विकास कार्य चल रहे हैं, सभी में केंद्र की योजनाओं का पैसा है लेकिन वाहवाही बटोरने के लिए भाजपा के नेता पीछे नहीं है। बाद में ज्ञापन देने के लिए कांग्रेस का शिष्टमंडल कलेक्टर कार्यालय पहुंचे जहां राज्यपाल के नाम ज्ञापन जिलाधीश को सौंपा।