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घाटे वाले रूट ठेके पर देने की तैयारी

बीकानेर.bus रोडवेज ने घाटे वाले रूट को फ्रेंचाइजी के तहत देने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए रोडवेज प्रबंधन ने प्रदेश के सभी डिपो प्रबंधकों से प्रस्ताव मांगे है। इस प्रस्ताव के मांगने के साथ ही रोडवेज कर्मचारियों में विरोध भी शुरू हो गया है। राज्य सरकार ने रोडवेज के लिए 1150 नई बसें खरीदने का निर्णय लिया है। इसकी सहमति का पत्र जब रोडवेज प्रबंधन को मिला तो उसमें घाटे वाले रूटों की जानकारी भी मांगी गई थी।

वित्त विभाग की ओर से जारी इस आदेश को पूर्णतया गोपनीय रखा गया लेकिन जब रूटों का निर्धारण शुरू हुआ और प्रस्ताव तैयार होने लगे तो कर्मचारियों की इसकी भनक लग गई। अलवर और भरतपुर में तो विरोध भी शुरू हो गया है। बीकानेर डिपो के पास जब यह निर्देश पहुंचा तो आनन-फानन में श्रीगंगानगर, सूरतगढ़ और खाजूवाला के कुछ रूटों को इस श्रेणी में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया।

इस बारे में जब बीकानेर डिपो के कर्मचारियों को पता चला तो उन्होंने भी इसका विरोध कर दिया। आखिर में पूगल क्षेत्र के आनंदगढ़ रूट को घाटे वाला बताते हुए प्रस्ताव भेजा गया। इस रूट पर रोडवेज की आय नगण्य है। जानकारी के अनुसार वित्त विभाग की मंशा है कि घाटे वाले रूटों के लिए फ्रेंचाइजी तय किए ताकि रोडवेज के घाटे को कम किया जा सके।

वित्त विभाग के इस निर्देश से कर्मचारी संगठन खफा है। उनका कहना है कि इन रूटों को फ्रेंचाइजी को देने की बजाय किराया कम करना चाहिए। आज भी यात्रियों की प्राथमिकता रोडवेज है। किराया कम होने के कारण निश्चित रूप से इस घाटे की बसों को लाभ में लाया जा सकता है। कर्मचारी नेता रामेश्वर शर्मा ने बताया कि फ्रेंचाइजी के माध्यम से राज्य सरकार यह रूट निजी बस आपेटरों को सौंपना चाहती है जिसका विरोध किया जाएगा।

अवैध वाहनों के संचालन के कारण ही रोडवेज के सामने आज घाटे की स्थिति है। रूटों की फ्रेंचाइजी को देने पर निजी बस आपरेटर मनमाना किराया वसूलेंगे जिसका खामियाजा आम यात्रियों केा उठाना पड़ेगा।

उल्लेखनीय है कि एक ओर जहां परिवहन विभाग गांव-गांव तक परिवहन सेवा शुरू करने जा रहा है वहीं रोडवेज के कई रूटों पर निजीकरण को बढ़ावा देने का प्रयास हो रहा है। आज भी जिले के कई गांवों से प्रतिदिन रोडवेज को आवेदन पत्र मिल रहे हैं जिसमें गांव में भी रोडवेज सेवा शुरू करने की मांग की जा रही है।





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