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वेज कटलेट में लोहे की तार

चंडीगढ़. bhard भारद्वाज फैमिली को शताब्दी एक्सप्रेस में सफर करना काफी महंगा पड़ा। चंडीगढ़ के पूर्व चीफ इंजीनियर वीके भारद्वाज और उनकी पत्नी अल्का भारद्वाज शनिवार को रिश्तेदार से मिलने मर्ॉ्िनग शताब्दी में चंडीगढ़ से दिल्ली के लिए रवाना हुए। भारद्वाज ने दिल्ली से टेलीफोन पर बताया कि शताब्दी में अंबाला से कैटरिंग का सामान लोड हुआ।

करनाल के पास जब नाश्ता सर्व किया गया तो उनकी पत्नी अल्का ने वेज कटलेट खाया। इस दौरान उन्होंने गले में चुभन के साथ सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की। देखा तो गले में लोहे की तार फंसी नजर आई। इस पर ट्रेन के वेटर को बुलाकर शिकायत की गई और डॉक्टर को बुलाने को कहा गया, लेकिन शताब्दी में कोई डॉक्टर नहीं था। tar

लोहे की तार को किसी तरह फोर्क से निकाला गया, जिससे काफी जख्म हो गए। सी-9 कोच, जिसमें वे ट्रैवल कर रहे थे, इत्तेफाक से उसमें एक डॉक्टर भी थे। डॉक्टर ने अल्का को देखा और कहा कि अस्पताल ले जाना पड़ेगा। भारद्वाज ने बताया कि दिल्ली में पत्नी को अस्पताल ले गए।

दिनभर उनकी पत्नी को डॉक्टर्स की देखरेख में रखा गया। शाम करीब 6 बजे उनकी पत्नी को अस्पताल से छुट्टी मिली। गौरतलब है कि शताब्दी सहित देश की अन्य लग्जरी गाड़ियों में फूड मेन्यू को बदलने और इम्प्रूव करने के लिए रेल मंत्रालय द्वारा बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन असल में ऐसा नहीं है।

फूड क्वालिटी को लेकर पैसेंजर्स की हमेशा शिकायत रहती है। इस बारे में आईआरसीटीसी के चीफ रीजनल मैनेजर अनीत दुल्लत ने कहा कि ऐसा कभी-कभार हो जाता है, लेकिन फिर भी इसे गंभीरता से लिया गया है। जिस कुक ने लापरवाही बरती है, उसे सस्पेंड कर दिया गया है और कॉन्ट्रैक्टर पर जुर्माना लगाने की सिफारिश की गई है।

कटलेट की पहले भी आई शिकायत
शताब्दी में सर्व किए जाने वाले कटलेट को लेकर बहुत से पैसेंजर्स की शिकायतें आती रही हैं। अभी कुछ माह पूर्व ही सन्मुख सिंह जॉली और सुरजीत कौर ने शताब्दी से दिल्ली जाते समय ब्रेकफास्ट में कटलेट खाया था और वे फूड पॉइजनिंग के शिकार हुए थे। सन्मुख सिंह ने बताया कि फूड पॉइजनिंग के चलते उन्हें दिल्ली में ही दो-तीन दिन बेड पर रहना पड़ा था।





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