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दवा और साबुन से धुल गई आमदनी

रायपुर. राज्य जिन 50 वस्तुओं पर वैट के तहत टैक्स वसूल रहा है, उनमें से 20 वस्तुओं से सरकार को होने वाली आमदनी पिछले साल के मुकाबले कम हो गई। महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हीं प्रोडक्ट में टैक्स चोरी ज्यादा हो रही है, जो रोजमर्रा के काम आते हैं। अफसरों का मानना है कि ऐसी सभी वस्तुओं की उपयोगिता तेजी से बढ़ी है। ऐसे में टैक्स कम होना आश्चर्यजनक ही है।

मूल्य संवर्धित कर अधिनियम (वैट) के तहत व्यापारियों को करों का स्वनिर्धारण की छूट है। शासन की सोच थी कि सेल्फ असेसमेंट से टैक्स बढ़ेगा, लेकिन कई वस्तुओं में मामला उलटा हो गया। अफसरों ने बताया कि वाणिज्यिक कर विभाग में 50 हजार पंजीकृत व्यापारी है। इनमें से 30 फीसदी इन्हीं वस्तुओं के कारोबार में लगे हैं।

अफसरों ने बताया कि पिछले साल तुलनात्मक रूप से टैक्स से आमदनी 25 फीसदी बढ़ी थी। इस साल विभाग ने 31 दिसंबर तक के आंकड़े कलेक्ट कर लिए हैं। इनके मुताबिक आमदनी सिर्फ 12 फीसदी ही बढ़ी है।

पिछले साल दिसंबर तक 1391 करोड़ 27 लाख रुपए मिला था। चालू वित्तीय वर्ष में 1561 करोड़ 38 लाख रुपए मिल पाए हैं। आमदनी में वृद्धि की तुलना की जाए तो यह राशि काफी अधिक होनी चाहिए। वाणिज्यिक कर विभाग के पास सरकारी मदों से पैसा नहीं आने की समस्या भी बनी हुई है।

पिछले साल की तुलना में पेट्रोल डीजल का रेट कम होने के कारण करीब 42 करोड़ रुपए का कर कम मिला। तेंदूपत्ते पर हाईकोर्ट के स्टे के कारण करीब 14 करोड़ रुपए कम मिले हैं। टिम्बर पर वन विभाग ने तो व्यापारियों से वैट डिडक्ट कर लिया, लेकिन अब तक वाणिज्यिक कर विभाग को करीब 5 करोड़ 43 लाख रुपए हस्तांतरित नहीं किए गए।

केंद्र की चुप्पी
1 अप्रैल 2006 से वैट लागू होने के बाद केंद्र सरकार से राज्य को इस वर्ष 178 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति मिलनी है। वाणिज्यिक कर आयुक्त अजय सिंह ने बताया कि राज्य शासन ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है, लेकिन अब तक केंद्र से कोई राशि नहीं मिली है।

छापे मारे जाएं : अमर
वाणिज्यिक कर मंत्री अमर अग्रवाल ने अफसरों को निर्देश दिए हैं कि पूरी स्थिति की समीक्षा कर कर चोरी करने वाले व्यापारियों के यहां छापे मारे जाएं। किसी को बख्शा नहीं जाए। वाणिज्यिक कर आयुक्त अजय सिंह ने कहा कि कर चोरी करने की संभावना जिन वस्तुओं के व्यापारियों पर है, उन पर खास निगाह रखी जा रही है। अब सख्ती की जाएगी।





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