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Bachhon Ka Kona Bachhon Ka Kona
संता हवलदार एक दिन ड्यूटी छोड़कर अपने घर पहुंचा, तो उसने देखा कि उसकी बीवी स्वेटर बुन रही है और ऐश ट्रे में एक अधजली सिगरेट पड़ी है। यह देखकर उसका पारा चढ़ गया। उसने दहाड़ते हुए कहा- अगर तुमने यह नहीं बताया कि यह सिगरेट कहां से आई, तो मैं तुम्हारी पिटाई लगाऊंगा।
बीवी कुछ कहती, इसके पहले सोफे के पीछे से एक डरी हुई आवाज आई- बगल वाली दुकान से।
-निरंजन पाल, दंतेवाड़ा (छग)।
* घर गंदा पड़ा हुआ था और साफ-सफाई करने की बजाय बहू सजने संवरने में लगी थी। यह देखकर सास झाड़ू लगाने लगी। बेटे संता रंजन से यह देखा नहीं गया। उसने कहा- लाओ मां, मैं झाड़ू लगा देता हूं।
मां ऊंची आवाज में बहू को सुनाते हुए कहती है- अरे रहने दे बेटा, मैं ही लगा देती हूं। यह सुनकर बहू मिसेज संता लिपस्टिक लगाते हुए कहती है- अरे झगड़ते क्यों हो, काम बांट लो न। एक दिन बेटा झाड़ू लगा देगा और एक दिन मां लगा देगी।
-विक्रम मौर्य, छतरपुर (मप्र)।
* संता मुखर्जी देर रात को घर से निकल जाता। वह जाते समय अपनी पत्नी से कहता- चार बच्चों की मम्मी, गुडनाइट। एक दिन उसकी पत्नी ने पलटकर कह दिया- दो बच्चों के पापा, गुडनाइट। बस, उसी दिन से संता ने रात में बाहर जाना बंद कर दिया।
-अमर सिंह, झांसी (उप्र)।
* संता भिखारी- मैं बहुत लाचार हूं, कुछ खाने को दे दीजिए।
मिसेज बंता- हट्टे-कट्टे तो दिख रहे हो। हाथ-पैर भी सलामत हैं। फिर किस बात से लाचार हो?
संता भिखारी- जी अपनी आदत से।
- अर्पिता सेन कोटा (राज)।