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इतना अरमान है, छूना आसमान है

जालंधर. आशाएं और मंजिल का रास्ता जुदा नहीं है। आशा को पूरा करना और मंजिल पा लेना मेरा सपना है और इसको पूरा करने के लिए मिस्टर इंडिया से बेहतर ऑप्शन शायद ही कोई हो। यह कहना है हैवर्डस 5000 मिस्टर इंडिया के फाइनलिस्ट करण कुंद्रा का। सैकड़ों कन्टैस्टेंट, टफ कंपीटिशन और सवालों की उलझनों को सुलझाते हुए सिटी के करण अपने सपने को हकीकत का रूप देने के लिए बस एक कदम की दूरी पर हैं।

शनिवार को मुंबई में होने वाले फाइनल से पहले एक हफ्ते की ट्रेनिंग में भाग लेने को उत्सुक करण बताते हैं नार्थ रीजन से सिलैक्ट होना गर्व की बात थी। सात साल बीत चुके हैं और यहां से कोई भी कन्टेस्टैंट मिस्टर इंडिया के फाइनल तक नहीं पहुंचा। अगर मैं जीत गया तो मेरे सपनों को मंजिल मिलने के साथ-साथ जालंधर का नाम भी रोशन होगा।

बिजनेस से ग्लैमर तक का सफर
करण कॉल सैंटर चलाते हैं। वे बताते हैं बिजनेसमैन होते हुए ग्लैमर वल्र्ड में दस्तक देने का मकसद केवल माडलिंग न होकर खुद को आल राउंडर बनाना है। बिजनेस से वक्त निकाल पाना मुश्किल है, लेकिन अपनी हाबी से खुद की पहचान बनाने का सपना मुझे और भी ज्यादा मेहनत करने पर मजबूर कर देता है और मिस्टर इंडिया से बढ़कर क्या हो सकता है।

प्रश्नों का जाल करता है नर्वस
दिल्ली में जब नार्थ रीजन के 50 टॉप मॉडल चुने गए तो मन में कंपीटिशन को लेकर टैंशन नहीं थी। हर राउंड को आसानी से पार करता गया। क्वैश्चन राउंड में मेरे से पहले जो कन्टेस्टैंट से सवाल किए जा रहे थे वो अजीब थे।

किसी को आन स्पाट नाचने को कह दिया जाता तो किसी को प्रश्नों के जाल में फंसा लिया जाता। मेरी बारी में किस्मत ने साथ दिया और आसान से सवाल का जवाब ही देना पड़ा। बस सिलैक्ट हो गया, लेकिन मुंबई में इससे भी टफ कंपीटिशन की उम्मीद है।





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