जालंधर.
केएमवी में 5 जनवरी की रात हुए सनसनीखेज हत्याकांड के कातिलों के चेहरे बेनकाब करने के लिए पुलिस ने चौकीदार शमशुद्दीन की पत्नी मुन्नी से पूछताछ की। मुन्नी से डीएसपी (डी) रघुबीर सिंह संधू और सीआईए स्टाफ के इंचार्ज हरिंदर सिंह गिल ने लगभग दो घंटे तक पूछताछ की।
गेटकीपर रमन शनिवार दोपहर मुन्नी को सीआईए स्टाफ लेकर आया। गौरतलब है कि मुन्नी पति की अंतिम रस्में निभाकर गांव से लौटी थी। एक अन्य पुलिस पार्टी निकलवाए गए मोबाइल रिकार्ड की खाक छान रही है। पुलिस कुछ चुनिंदा मोबाइल नंबरों नाम और पते निकलवा रही है।
कुछ खास नहीं बोली मुन्नी: पूछताछ के दौरान मुन्नी सदमे में ही रही। उसका कहना था कि पति की मौत के बाद उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है। उसने इतना जरूर कहा कि पुलिस जल्द उसके पति के कातिल को पकड़कर सजा दिलवाए।
शमशुद्दीन ने कभी उससे कोई ऐसी बात नहीं कही, जिससे हत्याकांड के तार जुड़ सकें। पुलिस का मानना है कि मुन्नी के सदमे में होने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं कर पा रही है। पुलिस मुन्नी को फिर से पूछताछ के लिए तलब करेगी।
इलैक्ट्रीशन से भी पूछताछ: बिजली मकैनिक अश्विनी कुमार से भी सीआईए स्टाफ में पूछताछ की गई। 5 जनवरी की रात अश्विनी ड्यूटी पर था। उसने बताया कि प्रिंसीपल के घर से उसका ड्यूटी रूम काफी दूरी पर है। इसलिए उसे कुछ नहीं पता। पुलिस ने कुछ अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया।
फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट जुटे जांच में: एक्सपर्ट प्रिंसीपल के घर से लिए फिंगर प्रिंट मिलाने में जुटे हैं। उन्होंने प्रिंसीपल के घर से फिंगर प्रिंट जुटाए थे। वे घर से मिले फिंगर प्रिंटस को रसोईए किशोर मंडल, चौकीदरा तरसेम और शमशुद्दीन से मिलाकर देख रही है। अगर यह बात साफ हो गई कि प्रिंसीपल के घर से मिले फिंगर प्रिंट उनके नहीं है तो संभवत: वह कातिल के हैं। कातिलों के पकड़े जाने के बाद उन्हें सूली तक पहुंचाने के लिए फिंगर प्रिंट पक्के सबूत होंगे।
क्यों नहीं दे रहा आरबीआई रिपोर्ट: लगभग 15 दिन पहले रिजर्व बैंक आफ इंडिया की एक टीम प्रिंसीपल ऋता बावा के घर से मिले 37 लाख रुपए में से 5 लाख रुपए के सीरियल नंबर जांच के लिए ले गई थी। इतना समय बीतने के बाद भी आरबीआई ने रिपोर्ट नहीं भेजी।
रिपोर्ट में देरी को लेकर अब कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। नोटों के माध्यम से पुलिस उस व्यक्ति तक पहुंच सकती है, जिसने प्रिंसीपल को इतनी मोटी रकम क्यों और किस लिए दी थी।