अमृतसर. तस्कर को पकड़ने के मौके पर सेहतमंत्री और सुपरिंटेंडैंट नारकोटिक्स के बीच गहराए विवाद में नया मोड़ आ गया है। एक तरफ जहां एसपी ने घटनाक्रम को गलत करार देते हुए सेहतमंत्री को ‘मां’ का दर्जा दिया है वहीं दूसरी तरफ सेहतमंत्री ने भी कहा कि वह तो उनके ‘बेटे’ के बराबर है। इसके साथ ही विवाद के शांत होने के आसार नजर आने लगे हैं।
सुपरिंटेंडैंट बलविंदर सिंह ने स्पष्ट किया कि तस्कर भागने की कोशिश कर रहा था और वह पकड़ने में लगे थे। इससे ज्यादा कुछ नहीं हुआ। उसे अंत में जाकर पता चला कि इसबीच आकर पूछताछ करने वाली महिला सेहतमंत्री थीं।
उसका कहना है कि उसके घर भी बहन-बेटियां हैं। उम्र के लिहाज से वह उनकी मां के बराबर हैं। वह गुरुघर में खड़ा होकर कसम खाने को तैयार है कि उसने प्रो. चावला के बारे में कुछ भी अपशब्द या आपत्तिजनक नहीं किया। मीडिया के कुछ लोगों ने मामले को घुमा दिया, जिससे मंत्री जी को लगा कि उसने गलत किया है। उन्हें धक्का भी हमारे ही साथी से गलती से लग गया था, उस समय शायद मंत्री उसे न पहचान पाई हों।
वहीं,प्रो.चावला का कहना है कि बलविंदर से उनकी कोई रंजिश या दुश्मनी नहीं है। वह तो उनके बेटे के बराबर है लेकिन उस दिन का उसका रवैया काफी क्षोभजनक रहा। विवाद वाले दिन भी उसे काका कहकर बुलाया था, लेकिन उसने उनकी न सुनी और उलटी सीधी बयानबाजी करने लगा।
निश्चित रूप से उसने साहस के साथ तस्कर को पकड़ा, लेकिन उसे बाकी लोगों का भी ख्याल रखना चाहिए था। हम जवानों के साथ थे, हैं और रहेंगे। पहले भी हमारा दिल कार्रवाई के लिए नहीं मान रहा था, लेकिन उसने हमें मजबूर कर दिया।
भाजपा ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया
सेहत मंत्री से झड़प के मामले को भाजपा ने प्रतिष्ठा का सवाल बन लिया। सेहत मंत्री ने शिकायत वापसी का मन बना लिया है इसके लिए भाजपा के कई नेता ही राजी नहीं हैं। इस बारे में खुद प्रो. चावला का कहना है कि पार्टी को विश्वास में लेकर ही कार्रवाई की जाएगी। वैसे विधानसभा अध्यक्ष को लिखकर शिकायत कर दी है, उस बारे में भी विचार करना होगा।
क्या है मामला
दो किलो हैराईन तस्करी मामले में 30 अक्तूबर को दर्ज केस में परमजीत और हरजीत की गिरफ्तारी के बाद से ही कुख्यात तस्कर सुख्खा वांछित था। 30 जनवरी को हैरोइन के तस्कर को पकड़ने के लिए बलविंदर सिंह उसका पीछा कर रहे थे। इस दौरान पहुंची सेहत मंत्री ने मामले की जानकारी चाही तो नारकोटिक्स टीम और उनके बीच काफी आरोप-प्रत्यारोप हुए।