भोपाल. गुरुजी नियमितीकरण की मांग को लेकर सप्ताह भर से आरपार की लड़ाई का मूड बनाकर मैदान में है, वहीं सरकार का रवैया अब भी ढुल-मुल है। गुरुजियों ने दो टूक कह दिया है कि वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर अडिग हैं, लेकिन उन्होंने राजधानी की जनता को हो रही असुविधा को चलते मुख्य सड़क से हटने का निर्णय लिया है। वे अपना धरना टीनशेड पर जारी रखेंगे।
गुरुजियों की हड़ताल के कारण मध्यप्रदेश शिक्षा गारंटी के तहत आदिवासी बहुल जिलों में संचालित 25164 शालाओं में ताले जड़े हुए हैं, जिससे 12 लाख से ज्यादा बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो गई है। प्रदेश के 28 हजार गुरुजियों की व्यथा यह है कि उन्हें अब तक आश्वासन ही मिला है।
हाल में सरकार दो बार मंत्रिमंडल स्तरीय बैठक में प्रोन्नत और गैर प्रोन्नत शालाओं के गुरुजियों को बढ़ा हुआ वेतन दिए जाने का निर्णय ले चुकी है, लेकिन आदेश जारी न होने से अब तक उन्हें एक पैसे का भी फायदा नहीं मिला है।
फैक्ट फाइल
राज्य में 25164 ईजीएस शालाएं हैं, जिनमें 28731 गुरुजी पदस्थ है।
इनमें से 21309 गुरुजियों को 2500 रुपए मानदेय मिल रहा है।
हाल में प्रोन्नत की गई शालाओं के 3755 गुरुजियों को 1000 रुपए से बढ़ाकर 2500 रुपए दिए जाने का निर्णय अप्रैल 2007 में लिया जा चुका है। लेकिन उन्हें अब तक यह लाभ नहीं मिला है।
इसी तरह गैर प्रौन्नत शालाओं के 3677 गुरुजियों को एक हजार रुपए से बढ़ाकर मानदेय 1750 रुपए किए जाने का निर्णय लिया गया उन्हें अब भी एक हजार रुपए का ही भुगतान किया जा रहा है।