भोपाल.
दो सप्ताह से तापमान में गिरावट के कारण खेतों पर पड़े ‘पाले’ ने फसल बुरी तरह बरबाद कर दी है। भोपाल, बैतूल, विदिशा, सागर, दमोह, छतरपुर, होशंगाबाद, नरसिंहपुर, जबलपुर, मंडला, छिंदवाड़ा, ग्वालियर सहित मालवा के भी कई जिलों में फसलों के बरबाद होने के समाचार हैं। चना, तुअर, मटर और सब्जियों की फसलों का सबसे ज्यादा नुकसान होने की जानकारी है।
जिलास्तर पर कृषि विभाग ने पटवारी और राजस्व के अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर नुकसान का पता लगाने के लिए सर्वे शुरू कर दिया है। गैरसरकारी आकलन के अनुसार कई जिलों में तीस फीसदी या उससे अधिक खड़ी फसलों को नुकसान हुआ है।
तापमान में दो सप्ताह से गिरावट के कारण मौसम में ठंडक बढ़ रही है और रात को कोहरा भी छाया रहता है। इसका असर अब खेतों में खड़ी दलहनी और सब्जियों की फसलों पर दिखाई देने लगा है। भोपाल, सागर, जबलपुर, उज्जैन संभागों के कृषि अधिकारियों का कहना है कि ठंड के कारण देरी से बोई गई फसलों पर काफी असर पड़ रहा है। जिन फसलों को पर्याप्त पानी नहीं मिला है, वे भी तापमान में आई गिरावट से प्रभावित हुई हैं।
कृषि विभाग के संभागीय अधिकारियों ने दैनिक भास्कर को बताया कि ठंड से प्रभावित फसलों का सर्वे शुरू करा दिया गया है। विदिशा जिले में चने-मटर पर असर: भोपाल संभाग के विदिशा जिले में चने और मटर की फसलों को नुकसान हुआ है। हमारे होशंगाबाद संवाददाता के अनुसार जिले में कृषि विभाग ने मैदानी अमले को सतर्क कर दिया है।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसलों की सतत निगरानी करें। संयुक्त संचालक एमएल राजपूत ने बताया कि होशंगाबाद के पचमढ़ी क्षेत्र में कड़ाके की ठंड के कारण पिपरिया और सोहागपुर की फसलों पर विपरीत असर पड़ा है। हालांकि कृषि अधिकारी यह भी कहते हैं कि होशंगाबाद और हरदा जिलों के खेतों की गीली मिट्टी से फसलों पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ा है।
सागर में तुअर और दलहनी फसलें प्रभावित
सागर संभाग के संयुक्त संचालक कृषि एसएस ठाकुर ने बताया कि सागर, दमोह, छतरपुर आदि जिलों में ठंड ने तुअर और अन्य दलहनी फसलों को प्रभावित किया है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि जिन खेतों में फसल में फूल आ रहे हैं, उन पर बहुत ज्यादा असर पड़ा है।
फसल को बचाने के लिए क्या करें
- तापमान में गिरावट की संभावना पर किसान अपने खेत में सिंचाई कर दे।
- सिंचाई नहीं कर पाने की स्थिति में खेत के चारों तरफ धुंआ किया जाए।
पाले से बचने सीहोर में सुतली का प्रयोग
पाले से फसलों को बचाने के लिए किसान सुतली की रस्सी का उपयोग कर रहे हैं। यह प्रयोग या तो रात में या फिर अलसुबह किया जा रहा है। इसमें एक लंबी रस्सी बना ली जाती है। इसके बाद उस रस्सी को दोनों तरफ से दो लोग पकड़ लेते हैं और इस तरह खेत के एक किनारे से चलकर दूसरे किनारे तक जाते हैं। इसमें सुतली की रस्सी फसल पर जमे पाले को हटाती जाती है। कई किसान इस तरह का प्रयोग कर रहे हैं।