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पंचायतीराज प्रतिनिधियों पर गाज

अजमेर. दस ग्राम पंचायतों के शहरी सीमा में शामिल होने से 112 वार्ड पंचों को सदस्यता से हाथ धोना पड़ जाएगा। वहीं जिला परिषद के एक और पंचायत समिति के 7 सदस्यों पर भी तलवार लटक गई है। एक साथ चार सदस्यों का अस्तित्व खत्म होने से श्रीनगर पंचायत समिति के प्रधान अल्पमत में आ जाएंगे, वहीं दस सरपंचों को निगम में कॉपरेरेटर के रूप में प्रतिनिधित्व करने का अवसर भी मिलेगा।

स्थानीय निकाय निदेशालय की ओर से जारी अधिसूचना के आधार पर प्रस्तावित शहरी सीमा में 18 गांव शामिल किए जा रहे हैं। इस दायरे में श्रीनगर पंचायत समिति की सात तथा पीसांगन पंचायत समिति की तीन ग्राम पंचायतें शामिल हैं। शहरी सीमा में शामिल होने के बाद इन पंचायतों के साथ जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य तथा वार्ड पंचों के पद का भी अस्तित्व खत्म हो जाएगा।

जिला परिषद के वार्ड क्षेत्र 28 की तीन को छोड़ कर छह (सेदरिया, पालरा, रसूलपुरा, घूघरा, माकड़वाली, हाथीखेड़ा) ग्राम पंचायतें शहरी सीमा में शामिल हो रही हैं। इससे जिला परिषद सदस्य कुंदन सिंह रावत का पद खतरे में पड़ गया है, जबकि श्रवण सिंह रावत तथा मुन्नी देवी के वार्ड भी प्रभावित होंगे। वहीं श्रीनगर पंचायत समिति क्षेत्र के पांच व पीसांगन के दो पंचायत समिति सदस्यों के अतिरिक्त 112 वार्ड पंचों की सदस्यता भी खतरे में पड़ जाएगी।

श्रीनगर पंचायत समिति पर अल्पमत की तलवार

गांवों की गणित गड़बड़ाने का सर्वाधिक खामियाजा श्रीनगर पंचायत समिति को भुगतना पड़ेगा। इसके पांच सदस्य नीबां सिंह रावत, शंकर सिंह रावत (दोनों भाजपा), मीना कुमारी, मांगी लाल गुर्जर तथा जतन देवी (तीनों कांग्रेस) के वार्ड क्षेत्र खत्म हो रहे हैं। लिहाजा इनकी सदस्यता भी खतरे में है।

पंचायत समिति में कांग्रेस व भाजपा के दस-दस और एक निर्दलीय मिलाकर कुल 21 सदस्य हैं। निर्दलीय गोपाल चौधरी के समर्थन से कांग्रेस के महेन्द्र सिंह गुर्जर प्रधान पद पर काबिज हैं। तीन सदस्यों का अस्तित्व खत्म होने से बोर्ड के वजूद पर खतरा मंडराने लगेगा।

पीसांगन के भी दो सदस्यों पर तलवार

पीसांगन पंचायत समिति की तीन ग्राम पंचायत दौराई, सोमलपुर तथा तबीजी के निगम में शामिल होने से पंचायत समिति सदस्य रमजान खां (कांग्रेस) तथा जमना देवी (भाजपा) की सदस्यता भी खतरे में है।

सरपंच करेंगे प्रतिनिधित्व

शहरी सीमा में शामिल होने के बाद संबंधित ग्राम पंचायतों के सरपंच ही निगम में गांवों का प्रतिनिधित्व करेंगे। नगर पालिका नियमों के अनुसार परिषद से निगम का दर्जा मिलने के बाद शहर में शामिल होने वाले क्षेत्रों के वार्डो का पुनर्गठन कर छह माह के भीतर चुनाव कराने होंगे।

माकड़वाली व नारेली में 9-9, रसूलपुरा, घूघरा, हाथीखेड़ा में 13-13, सेदरिया, तबीजी, सोमलपुर तथा दौराई में 11-11 वार्ड पंच हैं। चाचियावास, पालरा के कुल 11 वार्ड पंच भी शहरी सीमा विस्तार का खामियाजा भुगतेंगे।

यह संवैधानिक संकट की स्थिति है। लोकसभा ने 73वें संशोधन के जरिए नया पंचायत राज कानून पारित किया है, जिसके तहत पंचायतराज प्रतिनिधि का चुनाव पांच साल के लिए होता है। ऐसे में राज्य सरकार एक अधिसूचना के माध्यम से उसके चुनाव को खत्म कैसे कर सकती है?

जो प्रक्रिया अपनायी गई है, वह बिल्कुल गलत है। शहरी सीमा में शामिल करने से पहले संबंधित गांवों से आपत्तियां आमंत्रित की जानी चाहिए। ऐतराज पर निर्णय के बाद ही शामिल करने की प्रक्रिया अपनायी जा सकती है। इसके बाद सबसे पहले परिसीमन कर वार्डो का गठन किया जाना चाहिए।

सरकार जो वर्तमान में कर रही है, उससे तो पंचायतराज के जनप्रतिनिधियों की स्थिति ‘जीरो’ हो जाएगी। उसका संवैधानिक पद खत्म हो जाएगा।
- सत्य किशोर सक्सेना, पूर्व जिला प्रमुख एवं वरिष्ठ अधिवक्ता





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