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दलित होने से अपराध कम नहीं होता

जयपुर. सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में एक बालिका से ज्यादती करने वाले दलित व्यक्ति की सजा को कम करने के राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को उलटते हुए सेशन कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। न्यायमूर्ति अरिजित पसायत और पी. सदाशिवम की खंडपीठ ने यह फैसला राजस्थान सरकार की अपील पर दिया।

हाईकोर्ट ने बालिका से ज्यादती के अपराधी मदन सिंह को सेशन कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को इस तर्क के साथ सात साल कर दिया था कि ज्यादती करने वाला दलित है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीड़ित या अपराधी की सामाजिक हैसियत को देखकर सजा तय नहीं होनी चाहिए, बल्कि अपराध की गंभीरता ही इसका आधार हो सकती है। भादंसं की धारा 376 (2) के तहत कम से कम दस साल की सजा का प्रावधान है, जिसे केवल विशेष परिस्थितियों में कम किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चियों से ज्यादती के आरोपियों से कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।





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