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बापू से हजारों ने ली दीक्षा

रायपुर. सत्संग स्थल साइंस कालेज मैदान पर बापू से दीक्षा लेने की कामना लिए दूरदराज क्षेत्रों से आए हजारों भक्त उपस्थित थे। प्रवचन से पूर्व करीब एक घंटे तक चले दीक्षा समारोह में बापू ने दीक्षित किया और सदैव गुरु के दिखाए रास्ते पर चलने के साथ ही गुरुमंत्र का जाप करने को निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि जिसे गुरु के प्रति भक्ति जागृत हो जाती है, उसकी मां-पिता व कुलगोत्र धन्य हो जाता है।

दीक्षा समारोह के बाद प्रवचन करते हुए बापू ने कहा कि जब नेता बोलता है तो वह भाषण होता है और जब संत बोलते हैं तो वह सत्संग होता है। इससे पूर्व सत्संग करते हुए बापू के शिष्य सुरेशानंद ने कहा कि गुरुमंत्र की दीक्षा लेने से मनोदशा ठीक हो जाती है और मनुष्य का मन शांत हो जाता है। उन्होंने कहा कि यदि हृदय का भाव सच्च है तो गुरुमंत्र और भगवान के भजन में ऐसी शक्ति आ जाती है कि फिर सारी शक्तियां उसके सामने क्षीण हो जाती हैं।

उन्होंने गुरुदीक्षा व उसके महत्व के बारे में भी बताया। सुरेशानंद ने कहा कि द्रौपदी के हृदय में भगवान का भाव था, इसलिए दुस्साशन की सारी ताकत खत्म हो गई, लेकिन द्रौपदी की साड़ी खत्म नहीं हुई। इसी तरह मीरा की भक्ति रोकने के लिए उसके परिवार के लोगों ने कितनी ताकत व बुद्धि लगाई, लेकिन वह ताकत बेकार हो गई।

मीरा की भक्ति जीत गई। उन्होंने कहा कि जो मनुष्य गुरु शास्त्र और भगवान के कहने पर अपना पूरा जीवन लगा देता है, उसे भी इसी प्रकार की शक्तियां प्राप्त हो जाती हैं। भगवान यदि किसी को दुख भी देते हैं तो अपना समझकर देते हैं। जब मनुष्य दुखों में होता है तो उसे केवल भगवान ही याद आते हैं और दूसरा कोई नहीं। जब मनुष्य की मनोस्थिति अच्छी होती है, तो फिर चाहे कैसी भी परिस्थितियां आ जाए, वह उससे मुकाबला कर लेता है।





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