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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. शहर के अनुसूचित जाति व जनजाति छात्रावासों से समस्याओं के बादल नहीं छंट रहे हैं। विभाग द्वारा प्रयास तो किया जा रहा है, लेकिन समस्याएं हैं कि दूर होने का नाम नहीं ले रही हैं। शहर में आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत करीब 14 छात्रावास संचालित हैं, लेकिन शायद ही किसी छात्रावास में आवास व पढ़ाई का उचित माहौल हो। विभाग का दरवाजा खटखटाकर छात्रों के हाथ थक चुके हैं, लेकिन समस्याएं इतनी पुरानी और बड़ी हैं कि अधिकारी इन्हें दूर कर पाने में खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
इधर स्कूल-कालेजों की परीक्षा सिर पर है, लेकिन छात्रावासों में गंदगी का वातावरण होने के कारण छात्रों को परीक्षा की तैयारी करने में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कहीं छात्र गंदगी से परेशान हैं, तो कहीं कंप्यूटर प्रशिक्षण ठप हो चुका है। कहीं टायलेट जाम है तो कहीं छात्रों को ही साफ-सफाई करनी पड़ रही है। यहां छात्रों को तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
साइंस कालेज के पास स्थित पोस्ट मेट्रिक अनुसूचित जनजाति छात्रावास सरकंडा को अगस्त 2007 में आठ कंप्यूटर विभाग ने छात्रों को प्रशिक्षण देने के लिए दिया है, लेकिन वहां पिछले एक महीने से कंप्यूटर शिक्षक नहीं आ रहा है, जिससे प्रशिक्षण बंद हो चुका है। छात्र भी कंप्यूटर बिगड़ न जाए इस डर से कंप्यूटर को नहीं छूते। यहां छात्रों को इस सत्र में न तो छात्रवृत्ति मिली है और न ही आगमन भत्ता। यहां करीब दो सौ छात्र निवास करते हैं, लेकिन उनके आवास की उचित व्यवस्था नहीं है।
आगमन भत्ते के रूप में पहले साल छात्रों को 800 रुपए, दूसरे साल 250 रुपए तो तीसरे साल 200 रुपए दिए जाते हैं, इसी तरह एक छात्र को एक साल में छात्रवृत्ति के रूप में 5 से 6 हजार रुपए मिलते हैं, लेकिन इस बार इनके अभाव में छात्रों को घर से रुपए लाकर दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करना पड़ रहा है। टायलेट जाम हो चुका है, जबकि नल की टोटियां खराब हो चुकी हैं, जहां से घंटों पानी बहता रहता है।
छात्रों ने बताया कि कभी-कभी तो पानी गलियारे में भी पहुंच जाता है, जिसे उन्हें खुद ही सुखाना पड़ता है। इसके अलावा पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था नहीं होने के कारण रात के समय गलियारों में अंधेरा छाया रहता है।
23 लाख मिले, अभी समस्या बरकरार
पंडित मोतीलाल नेहरू प्री मेट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास जरहाभाठा का जीर्णोद्धार कराने का निर्णय विभाग ने लिया है। इसके लिए विभाग ने 23 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। वर्तमान में शिक्षा सत्र चालू होने व छात्रावास में बच्चों के निवास करने की वजह से कार्य शुरू नहीं कराया जा रहा है, लेकिन वहां समस्याएं बरकरार है।
अपने घर से दूर आकर यहां रहने वाले 140 छात्रों को मच्छर, गंदगी सहित ठंड का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों को एक-एक कंबल दिया गया है, लेकिन ठंड अधिक होने के कारण उन्हें रात में ठंड लगती है। अधीक्षक एसके महादेवा ने यहां कोई समस्या नहीं होने की बात कही, लेकिन छात्रों ने समस्या होने की बात कही। छात्रों ने बताया कि यहां कंप्यूटर में हिंदी फोंट नहीं आने के कारण उन्हें कंप्यूटर सीखने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
पढ़ने के समय कर रहे साफ-सफाई
आदिवासी प्री मेट्रिक छात्रावास में छात्रों द्वारा शाम के समय मिलजुलकर साफ-सफाई की जाती है। जिस समय उन्हें पढ़ना चाहिए, वे झाड़ू पकड़े नजर आते हैं। छात्रों ने बताया कि ठीक तरह से साफ-सफाई नहीं होने के कारण यहां गंदगी फैल जाती है और उन्हें इस तरह के माहौल में रहना अच्छा नहीं लगता, इसलिए वे खुद ही साफ-सफाई करते हैं। यहां किसी भी छात्र ने भोजन की शिकायत नहीं की। पिछले साल छात्रावास का जीर्णोद्धार किए जाने के बाद इसकी हालत सुधर चुकी है।
कन्या छात्रावासों में भी समस्या
शहर के कन्या छात्रावासों में भी कुछ समस्याएं हैं। वहां बिजली, पानी, साफ-सफाई सहित कई समस्याएं हैं। यहां भी छात्राओं को परीक्षा की तैयारी करने में कठिनाई हो रही है। विभाग को इनके द्वारा समय-समय पर शिकायत की जाती है, लेकिन इसका कोई खास प्रभाव अधिकारियों पर नहीं पड़ता।