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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. स्टेशन-बस स्टैंड से घर आना हो या मेहमानों को लेने जाना हो.. रोज आफिस जाना हो या छुट्टी के दिन परिवार सहित कानन पेंडारी जाना हो। छात्रों को यूनिवर्सिटी जाना हो या ग्रामीणों को शहर आना हो, अब न आटो वालों को मनमाना किराया देने की जरूरत, न खचाखच भरी जीप में जान जोखिम में डालने की जरूरत। इन सभी लोगों के लिए अब सिटी बस है न..। हर किसी को सिटी बस का इंतजार है। यातायात का यह सस्ता व सुलभ साधन सभी को भा रहा है।
26 जनवरी से शुरू हुई सिटी बस सेवा इस समय 8 बसों की सहायता से शहर के चारों सिरों को जोड़ रही है। फिलहाल बतौर परीक्षण इन मार्गो पर चलाई जा रही है बसों का टाइम टेबल निश्चित नहीं किया गया है, लेकिन इसके बावजूद निर्धारित बस स्टैंड पर खड़े हो कर नागरिक बसों का इंतजार करते देखे जा सकते हैं। इस समय पावर हाउस तोरवा से कानन पेंडारी, रेलवे स्टेशन से मोपका, रेलवे स्टेशन से यूनिवर्सिटी और सेंदरी से चकरभाठा के बीच कुल 72 किलोमीटर की दूरी (चारों रूट मिलाकर) तय कर रही है।
इन चारों रूट में से तोरवा से कानन पेंडारी के बीच 16, रेलवे स्टेशन से मोपका के बीच 17, रेलवे स्टेशन से यूनिवर्सिटी के बीच 11 और सेंदरी से चकरभाठा के बीच 13 बस स्टाप हैं। इन चारों रूट के दोनों सिरों से अभी सुबह 7 बजे एक-एक बस रवाना की जाती है। बस संचालकों व स्टाफ के अनुसार अभी इस बात का सर्वे किया जा रहा है कि किस समय लोगों को कहां से बस की ज्यादा जरूरत रहती है।
इस समय औसतन एक रूट की बस में रोज 400 लोग सफर कर रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा भीड़ कार्यालयीन दिवसों में रेलवे स्टेशन से यूनिवर्सिटी जाने वाली बस में रहती है, जबकि रविवार व छुट्टी के दिन तोरवा से कानन पेंडारी तक चलने वाली बस लगभग फुल हो जाती है। युवतियों व महिलाओं में बस को लेकर विशेष रुचि है। स्कूल-कालेज और बाजार जाने के लिए अब इन लोगों को परिजनों का इंतजार करने या फिर रिक्शे का धीमा व महंगा सफर करने की जरूरत नहीं।
इन बसों में सकरी, नर्मदा नगर, 27 खोली से अग्रसेन चौक के मार्केट तक आने-जाने वाली महिलाओं की भीड़ देखी जा रही है। इसी तरह रेलवे स्टेशन, तारबाहर, बस स्टैंड, सिविल लाइन, राजेंद्र नगर और नेहरू चौक से बड़ी संख्या में यूनिवर्सिटी जाने वाली छात्र-छात्राएं बस में सवार होती हैं। पहले इन लोगों को कोरबा मार्ग में चलने वाली यात्री बसों या फिर खचाखच भरी रतनपुर जाने वाली जीपों में सफर करना पड़ता था।
यात्री बसों में कई बार इन्हें बैठाया नहीं जाता था, या फिर बैठने के लिए जगह नहीं दी जाती थी। यही हालत कानन पेंडारी, चकरभाठा, मोपका जाने वाले यात्रियों की थी। अब इन लोगों को इस झंझट से छुटकारा मिल गया है। महज तीन से पांच रुपए में यहां के निवासी अब आराम से शहर आना-जाना कर सकते हैं। बस का रूट व समय इस तरह से तय किया गया है, कि हर स्टाप पर 45-45 मिनट के अंतराल पर बस पहुंच जाती है।
इस समय को कम करने की कोशिश की जा रही है, जिससे कि स्टाप पर लोगों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़े। फिलहाल ट्रायल की तौर पर स्टाप में सिर्फ बोर्ड लगाए गए हैं, लेकिन जल्दी ही यहां शेड वाले स्थाई स्टाप बनाए जाएंगे। बस संचालन समिति अभी इस बात पर भी नजर रख रही है कि स्टाप ऐसे स्थानों पर बनाए जाएं जहां कि बस खड़ी होने के बाद जाम नहीं लगे। वर्तमान में मगरपारा, बस स्टैंड, मंदिर चौक जरहाभाठा, सीएमडी चौक, राजेंद्र नगर चौक, नर्मदा नगर चौक में बस खड़े करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं हो रही है।
यहां बस खड़ी होने के बाद ट्रैफिक अस्त-व्यस्त हो जाता है। संचालन समिति ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर इन स्थानों पर बस स्टाप के लिए बेहतर स्थान तलाश कर रही है। सड़कें संकरी होने व यातायात अस्तव्यस्त होने के कारण ही अभी बसें शहर की भीतरी सड़कों पर नहीं चलाई जा रही है। बताया जा रहा है कि शीघ्र ही शहर के भीतर चलने के लिए मिनी बसें मंगाई जा रही हैं। इसके बाद शहर में किसी भी जगह पर जाने के लिए कम किराए में सिटी बस की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
एक पास और 8 बसों के मालिक
चकरभाठा से सेंदरी जाने वाली सिटी बस में सवार सकरी के 60 वर्षीय संतोष तिवारी सेंदरी आने पर भी नहीं उतरे। इसके बाद उन्होंने थैले से टिफिन डिब्बा निकाला और लंच करने लगे। जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वे राम कथा सुनने के लिए 2 बजे से ही घर से निकल गए थे। राम कथा प्रारंभ होने में कुछ विलंब था, इसलिए वे सिटी बस में चढ़ गए। शहर आने-जाने के लिए उन्होंने 31 जनवरी को ही सिटी बस का पास बनवा लिया है। अब वे शान से खुद को 8 बसों का मालिक बताते हैं। साथ में यात्रा कर रहे कुछ ग्रामीणों को वे बड़े ही चाव से अपना पास दिखा रहे थे।