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Shekhawati Shekhawati नवलगढ़. बात-बात में पत्नी को घर से बाहर का दरवाजा दिखाने की मानसिकता रखने वाले पति अपना नजरिया बदले लें तो अच्छा है। अपनी भलाई के इस काम में उन्होंने गंभीरता नहीं दिखाई तो फिर सरकार ही उनकी सोच बदल देगी।
आपसी घरेलू झगड़ों में महिलाओं (पत्नियों) पर सबसे ज्यादा आजमाए जाने वाले इन हथियारों को कुंद करने के लिए सरकार सभी सरकारी आवासीय योजनाओं के भवनों के आबंटन में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने जा रही है। योजना लागू करने के पीछे सरकार की सोच है कि मकान का मालिक होने का मतलब महिलाओं के पास महज आवास की सुविधा होने तक ही सीमित नहीं है।
उससे न सिर्फ उसकी सामाजिक हैसियत बढ़ती है बल्कि वह उसे आपदा की स्थिति में सुरक्षा भी मुहैया कराता है। बीडीओ गौरीशंकर चौधरी ने बताया कि योजना के बाद महिलाओं को उनका हक मिल सकेगा। इसके साथ महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों में भी कुछ हद तक कमी आएगी।
फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों में बेघर गरीब परिवारों को सरकार इंदिरा आवास मुहैया कराती है। आवास पर होने वाले खर्च का 75 प्रतिशत केंद्र व 25 फीसदी राज्य सरकार वहन करती है। आवास आबंटन परिवार की महिला के नाम होता है।
महिलाओं पर अत्याचार
यदि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना रंग लाती है तो महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों में भी कमी आएगी। फिलहाल महिलाओं पर अत्याचार की लिस्ट काफी लंबी है। नवलगढ़ पुलिस थाने की बात करें तो पिछले साल दर्जनभर से अधिक मामले यहां दर्ज हुए हैं। पुलिस का कहना है कि महिला को घर से बेदखल करने के मुकदमे इनमें अधिक होते हैं।
दो रास्ते, कौन सा चुनेंगे
सरकारी योजनाओं के सभी भवनों में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी होगी, लेकिन इसके लिए भी सरकार ने दो रास्ते तैयार किए हैं। पति के नाम होने वाले भवन आबंटन में पत्नी का नाम भी शामिल करना होगा या फिर उसे सिर्फ महिला के नाम से ही आबंटित किया जाएगा। अकेली रह रही महिला, विधवा महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।