अभिमत. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अगले कुछ दशकों में प्रति वर्ष कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या लगभग ८ लाख हो जाएगी। दिन पर दिन कैंसर से बढ़ती मौतों के बावजूद मरीजों की लापरवाही की प्रवृत्ति बीमारी को और भयावह बना रही है। सच तो यह है कि आधुनिक परीक्षण यंत्रों की सहायता से हम कैंसर को उसकी प्रारंभिक अवस्था में भी भांप सकते हैं। कैंसर कोशिकाएं ही कैंसर का हाल बताती हैं।
ऐसी कोशिकाएं कैंसर की पूर्वावस्था में ही रक्त के माध्यम से सूचना देने लगती हैं। तंबाकू एंव मदिरापान, अनावश्यक सूर्य किरणों का सेवन तथा अन्य प्रदूषणों के प्रति सचेत कर कैंसर की रोकथाम तो की ही जा सकती है, साथ ही साथ कैंसर के लक्षणों से परिचित करवा कर लोगों को सचेत भी किया जा सकता है। मनोचिकित्सक मरीजों के मन में पनपे भय को निकालकर उनकी जिंदगी को और बढ़ा सकते हैं।
कैंसर द्योतक : हमारे शरीर में पनप रही कैंसर अथवा टच्यूमर कोशिकाएं कई ऐसे जैव रसायन रक्त में स्रावित करती हैं जिसकी सहायता से हम कैंसर को उसकी शुरुआती अवस्था में ही परख सकते हैं। यही परख हमें कैंसर की चिकित्सा का साधन प्रदान करती हैं। हमारे रक्त के सीरम में बढ़े कुछ हारमोन एंव प्रोटीन बढ़ते हुए टच्यूमर की ओर इंगित करते हैं जिसके आधार पर हम उसकी चिकित्सा कर सकते हैं।
सीरम में उपस्थित ये मार्कर यह भी सूचना देते हैं कि कहीं कैंसर कोशिकाएं पुन: सक्रिय तो नहीं हो गई हैं। कैंसर की कीमोथेरैपी के बाद रक्त के सीरम में कैंसर मार्कर के घटे स्तर के आधार पर ही उसकी पुष्टि की जा सकती है। अन्य तरीकों से खाजे गए कैंसर मार्कर रक्त में उपस्थित प्रोटीन एंव शर्करायुक्त संरचनाओं के रूप में होते हैं।
इस प्रकार कैंसर कोशिकाओं द्वारा रक्त में स्रावित रासायनिक मार्कर से न केवल कैंसर की पहचान एंव इलाज संभव है अपितु मरीजों की जीवनावधि एंव उससे हो रही मौतों को भी रोका जा सकता है। आज चिकित्सा वैज्ञानिकों ने एक प्रकार से कैंसर का सारा इतिहास खोलकर सामने रख दिया है और हम इस मुकाम पर आ खड़े हुए हैं कि मैलिग्नैन्सी (अंतिम अवस्था) को छोड़कर कैंसर की सभी अवस्थाओं के निदान की विधियों एंव पहचान का पता लगाया जा चुका है।
चिकित्सा शोध की नवीनतम शाखा चिकित्सा प्रतिरोधी विज्ञान या क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी के माध्यम से कैंसर को समझने, परखने व इलाज में काफी सफलता मिल रही है।
कीमोथेरैपी : कैंसर इलाज में उच्च स्तरीय कोशकीय नाशक(साइटोटाक्सिक) रासायनिक चिकित्सा (कीमोथेरैपी) के प्रयोग से इस क्षेत्र मे नई क्रांति आई है। बच्चों में फैलने वाले रक्त कैंसर अधिकांशत: ठीक कर लिए जा रहे हैं।
कृत्रिम साइटोकाइन्स : बायोटेक्नालॉजी की सहायता से चिकित्सा वैज्ञानिकों ने अब स्वाभाविक रूप से पाए जाने वाले कोशिकीय उत्पाद बनाना प्रारंभ कर दिया है जो कैंसर इलाज में प्रयोग में लाए जा रहे हैं। इन्हें हम साइटोकाइन्स के नाम से जानते हैं। ये सभी उत्पाद कैंसर इलाज के समय दवाओं द्वारा हो रही शरीर में अन्य स्वस्थ्य कोशिकाओं की क्षति को रोकने में सहायक होते हैं।
रक्त चिकित्सा : प्राय: उच्च स्तरीय रासायनिक चिकित्सा के पश्चात खर्चीली अस्थि मज्जा प्रतिस्थापन (बोन मैरो ट्रांसप्लांट) का सहारा लिया जाता है पर यह तभी संभव है जब समान मिलान के दाता की व्यवस्था हो। इन कठिनाइयों से उभरने के लिए वैज्ञानिकों ने रक्त चिकित्सा का सहारा लिया है। इसके अलावा एडजूवेंट रासायनिक चिकित्सा, रेडियोथिरैपी, जीनथिरैपी और मनोचिकित्सा से भी कैंसर पीड़ितों को काफी राहत मिल रही है।