जयपुर. किडनी कांड के दोषी डॉ. सुरेशचंद गुप्ता को जेल जाने के बाद दो माह में दो बार सात-सात दिन के पैरोल पर बाहर जाने की छूट दी गई थी। इस मामले में पुलिस की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए आईजी ने जांच के आदेश दिए हैं। जेल जाने के बाद डॉ. गुप्ता ने जेल प्रशासन से अपनी मां रुक्मणी देवी (70) के बीमार होने व एसएमएस अस्पताल में ऑपरेशन का कारण बताते हुए सात दिन का अर्जेन्ट पैरोल देने की मांग की।
इस पर जेल अधीक्षक वी.के. माथुर ने पुलिस वेरीफिकेशन के लिए मामला श्यामनगर थाने भिजवा दिया। डॉ. गुप्ता ने अपने निवास राजेंद्र नगर श्यामनगर का पता दिया था। पुलिस ने जांच कर रिपोर्ट जेल अधीक्षक को भेज दी। इसके बाद डॉ. गुप्ता को सात दिन का पैरोल दे दिया गया।
डॉ. गुप्ता ने जनवरी में फिर 7 दिन का अर्जंट पैरोल देने का प्रार्थना-पत्र दिया। यह बताया कि पिछली बार मां का ऑपरेशन नहीं हो पाया था। इस बार भी जेल प्रशासन ने पहले की तरह औपचारिकता पूरी कर उसे सात दिन के पैरोल पर भेज दिया।
डॉ. गुप्ता के झूठ की जांच नहीं की
जेल प्रशासन व पुलिस ने डॉ. गुप्ता की ओर से दी गई जानकारी की जांच नहीं कराई। उसने मां की देखरेख करने वाला खुद को अकेला बताया था जबकि डॉ. गुप्ता के भाई भी हैं और उसकी मां उसके पास नहीं रहती। वह टोडारायसिंह में अपने पुश्तैनी मकान में दूसरे बेटे के पास रहती है।
ऑपरेशन के बारे में पता नहीं
डॉ. सुरेशचंद गुप्ता की पत्नी सुमन ने बताया कि उसकी सास की तबीयत खराब हुई थी। ऑपरेशन हुआ या नहीं, यह उसे पता नहीं। बीमारी के समय उसके पति पैरोल पर आए थे।
दो बार पैराल दिया था
जयपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक वी.के. माथुर ने बताया कि बंदी ने मां की बीमारी के कागजात पेश किए थे। इस पर पुलिस जांच आने के बाद ही दिसंबर व जनवरी में पैरोल पर भेजा गया।
एसएमएस अस्पताल में भर्ती थी
श्यामनगर थाना इंचार्ज सुनील पूनिया ने बताया कि जेल से दो बार डॉ. गुप्ता की मां के बारे में जांच आई थी। वह एसएमएस अस्पताल में भर्ती थी। वहां दिए जा रहे उपचार व बीमारी की पूरी सूचना जेल को भिजवा दी गई थी।
डॉ. गुप्ता के पैरोल के बहाने बाहर आकर संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त होने व पुलिस वैरीफिकेशन अधिकारियों की सूचना के बिना किए जाने की जानकारी मिली है। इस पर जांच के आदेश दिए हैं।
पंकज कुमार सिंह, आईजी, जयपुर रेंज प्रथम
अब तक क्या हुआ
डॉ.सुरेशचंद गुप्ता, डॉ.बसंत, नर्स सीमा, डा.संतोष उर्फ सन्नी व जीवन दादा के खिलाफ जयपुर में किडनी निकालने के तीन नवंबर 1995 में दर्ज हुए।
एक मामले में पांचों को 28 नवंबर 2007 में सात-सात साल की सजा हुई। इसी दिन तीनों को जेल भेज दिया था।
दूसरे में मामले में डा. संतोष व जीवन दादा के अलावा तीनों आरोपी बरी हो गए।
तीसरा मामला अभी विचाराधीन है। इसमें डॉ.सुरेश गुप्ता, डॉ.बसंत, नर्स सीमा, डॉ. संतोष उर्फ सन्नी, जीवन दादा, डॉ. अरुण व डॉ. नवीन गुलाटी आरोपी है।
चौथा मामला केवल डा. बसंत के खिलाफ पुलिस ने दर्ज किया था। वह भी विचाराधीन है।
डॉ. गुप्ता को सजा होने के दो माह बाद राजस्थान मेडिकल कौंसिल ने 4 फरवरी 08 को उसका रजिस्ट्रेशन रद्द किया।