HomeNewsMetrosJaipur Jaipur

गूंजेगी गिर के शेरों की दहाड़

जयपुर. अब वह दिन दूर नहीं जब नाहरगढ़ के जंगलों में एशियाटिक शेरों की दहाड़ गूंजेगी। देश की तीसरी और राज्य की पहली ‘लॉयन सफारी’ का रास्ता साफ हो गया है। नाहरगढ़ जैविक उद्यान में करीब 300 बीघा क्षेत्रफल में बनने जा रही लॉयन सफारी के लिए सीजेडए (सेन्ट्रल जू ऑथोरिटी) व सेन्ट्रल वाइल्ड लाइफ बोर्ड से हरी झंडी मिल गई है। वन विभाग के अनुसार मार्च-अप्रैल से काम शुरू कर दिया जाएगा।

अगले साल अक्टूबर-नवंबर से यह शुरू हो सकेगी।कैसा होगा वनराज का घर : नाहरगढ़ जैविक उद्यान में सुरा की बावड़ी के दक्षिण दिशा के ‘नीजर क्षेत्र’ के प्राकृतिक और घने जंगल में लॉयन सफारी बनाई जाएगी। 320 बीघा क्षेत्रफल के इस जंगल में मौजूद जानवरों के अलावा वनराज के लिए खाने के रिटायरिंग चेम्बर (क्यूबिकल) बनाए जाएंगे। यहां रेस्क्यू सेंटर की तरह ही इनके खाने की व्यवस्था की जाएगी। एशियाटिक शेरों के लिए अलग-अलग जगहों पर 3 से 4 पानी के कुंड बनाए जाएंगे।

इनमें पानी की व्यवस्था सहित जंगल का प्राकृतिक माहौल बनाए रखने के लिए भूमिगत पानी की सप्लाई की जाएगी। लॉयन सफारी के लिए जंगल को दो भागों में बांटने वाला ट्रैक बनाया जाएगा, जहां पहले से ही मौजूद गाड़ियों में ही पर्यटक शेरों को देख सकेंगे। जानवरों को परेशानी न हो, इसके लिए एक बार में केवल दो ही गाड़ियां प्रवेश कर सकेंगी। प्रवेश द्वार पर ही वाच टॉवर बना होगा, जहां भीड़ होने की स्थिति में पर्यटक शेरों से जुड़े रोमांचक नजारों को करीब से देख सकेंगे।

लॉयन सफारी के लिए प्रवेश और निकास के लिए एक ही गेट होगा, ताकि जानवर बाहर नहीं निकल सके। शेरों के लिए जंगल में गुफाएं भी बनाए जाएंगी। यह सारा सफारी क्षेत्र साढ़े पांच मीटर के चेनलिंग सिस्टम से कवर रहेगा। वन विभाग के प्रोजेक्ट के अनुसार इन सारी व्यवस्थाओं पर करीब डेढ़ करोड़ रुपए खर्च होंगे।

सबसे पहले लॉयन सफारी ही क्यों?

नाहरगढ़ जैविक उद्यान में लॉयन सफारी के अलावा प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर), भालू रेस्क्यू सेंटर, मगर पार्क भी बनना प्रस्तावित है। इन सब पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च होंगे। प्राणी उद्यान के लिए जानवरों के अनुकूल बड़े-बड़े पिंजरे बनाने में समय लगेगा, वहीं एक बड़ी परेशानी इनके लिए जानवरों की रहेगी।जयपुर जंतुआलय में वही जानवर सरप्लस हैं, जिनको देखने में पर्यटकों की खास दिलचस्पी नहीं है, जबकि लॉयन सफारी के लिए जंगल में अनुकूल माहौल है। रेस्क्यू सेंटर में विभिन्न सर्कस से छुड़ाए गए कुछ एशियाटिक शेर वर्षो से सकुशल रह रहे हैं।

लॉयन तो दिखेगा ही

टाइगर की अपेक्षा लॉयन समूह में रहता है। लॉयन सफारी की लोकप्रियता का कारण यह है कि इसमें पर्यटक नजदीक से शेरों की अठखेलियां देख सकते हैं। लॉयन सफारी के लिए जूनागढ़ (गुजरात) सासन गिर जंगल से पहली बार में ही करीब 10 शेर लाए जाएंगे।

एशियाटिक लॉयन : एक नजर

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार दुनियाभर में शेरों की प्रजातियों में अफ्रीकी और एशियाई सिंह (लॉयन) मौजूद हैं। इनमें भी एशिया के शेर कद-काठी में अपेक्षाकृत बड़े और ताकतवर माने जाते हैं। पहचान के तौर पर इसका रंग भूरा, लंबाई ढाई से तीन मीटर तक होती है। इसका मुंहबड़ा व चौड़ा होता है। सिर पर घने बाल होने के बावजूद कान बाहर निकले होते हैं। जबड़ा बेहद मजबूत होता है। गजब की फुर्ती होने से बड़े जानवरों को अपना शिकार बनाता है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: