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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior डबरा. उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर द्वारा डबरा नगर पालिका अध्यक्ष सत्यप्रकाशी परसेड़िया के विरुद्ध पार्षदों द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। पत्रकार वार्ता में श्रीमती परसेड़िया ने बताया कि उनके विरुद्ध ३ नवम्बर 20क्७ को धारा ४७ के तहत पार्षदों द्वारा पूर्व नियोजित साजिश के तहत अविश्वास प्रस्ताव कलेक्टर ग्वालियर के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
कलेक्टर ने उक्त प्रस्ताव को परियोजना अधिकारी शहरी विकास अभिकरण ग्वालियर को प्रस्तुत किया और उक्त प्रस्ताव से संबधित समस्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जिसके अंतर्गत श्रीमती परसेड़िया को पद से भी पदच्युत किया जा सकता था। इसके विरुद्ध श्रीमती परसेड़िया ने उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर के न्यायाधिपति राजेन्द्र मेनन के समक्ष याचिका क्रमांक ५२९३ -क्७ प्रस्तुत कर उक्त अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करने के लिए याचना की।
इस याचिका पर दिनांक २५ जनवरी क्८ को अंतिम रूप से सुनवाई करते हुये उक्त अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया। यूं खारिज हुआ प्रस्ताव: विद्वान न्यायाधिपति ने पांच बार प्रारंभिक सुनवाई कर याचिका को अंतिम सुनवाई के लिए ग्राह्य माना। अपने निर्णय को पांच बिंदुओं में उल्लेखित किया और लिखा कि अविश्वास प्रस्ताव नियम विरुद्व था। क्योंकि कलेक्टर ने परियोजना अधिकारी शहरी विकास अभिकरण को उक्त प्रस्ताव प्रस्तुत किया। प्रस्ताव में पार्षदों के हस्ताक्षर मुख्य नगरपालिका अधिकारी डबरा द्वारा प्रमाणित किए गए थे जो अवैधानिक थे।
उन्हें तो पार्षदों का मात्र परिचय प्रस्तुत करना था, मुख्य नपा अधिकारी द्वारा अध्यक्ष श्रीमती परसेड़िया की पदस्थापना से संबधित जानकारी बिना कलेक्टर के मांगे प्रस्तुत की गई जो अवैध थी। अविश्वास प्रस्ताव से संबधित प्रोसीडिंग कलेक्टर द्वारा लिखी जानी थी, लेकिन परियोजना अधिकारी शहरी विकास अभिकरण द्वारा लिखी गई, जो अवैधानिक थी।
उक्त संबध में किया गया पत्र व्यवहार नियम १९६२ की धारा ३५५ में पार्षद, शासन व कलेक्टर स्तर के अधिकारियों से पत्र व्यवहार नहीं करेंगे ऐसा उल्लेख है। पत्राचार मुख्य नपा अधिकारी के माध्यम से होना चाहिए जो नहीं किया गया। उपरोक्त बिंदुओं केआधार पर याचिका को ग्राह्य करते हुये अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया गया।