इंदौर. इंदौर जिला न्यायालय के लिए 56 नई सिविल कोर्ट की मंजूरी के पहले चरण में 20 नई कोर्ट संभवत: 1 अप्रैल से शुरू होगी। इसके लिए 20 नए जज भी पदस्थ हो गए पर स्थान की कमी के चलते नए न्यायालय शुरू नहीं हो सके। अब किराए के भवन तलाश किए जा रहे हैं जिनमें रिंग रोड के पास एक होटल में कमरे लेना भी प्रस्तावित है।
राज्य सरकार ने इंदौर जिला न्यायालय के लिए गत माह ही 56 नई सिविल कोर्ट मंजूर करते हुए अधिसूचना जारी कर दी है। शासन ने गत वर्ष लोक सेवा आयोग से चयनित सिविल जजों में से 20 जज इंदौर में पदस्थ कर दिए हैं, जिनकी ट्रेनिंग लगभग पूरी भी हो गई है। इसलिए कोर्ट प्रशासन द्वारा 20 नई सिविल कोर्ट चालू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। विशेष न्यायाधीश मनोहर ममतानी के मुताबिक हम जल्द से जल्द कोर्ट चालू करना चाहते हैं ताकि लंबित प्रकरणों की संख्या में कमी आ सके।
उधर, वकीलों का कहना है वैसे तो शहर में कुछ भवन देखे गए हैं किंतु जानकारी मिली है कि बांबे हॉस्पिटल के पास एक होटल के 20 कमरे लेना भी प्रस्तावित है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्रकुमार वर्मा व सचिव संजय शर्मा ने कहा वहां कोर्ट ले जाने का विरोध किया जाएगा क्योंकि दूर होने से वकील व आम लोग परेशान होंगे।
साढ़े चार एकड़ के कोर्ट परिसर में खाली जगह की कमी नहीं : संघ के सचिव श्री शर्मा ने बताया न्यायालय परिसर साढ़े चार एकड़ क्षेत्र में है। भवन, पार्किग स्थल के अलावा कोर्ट भवन के पीछे अटाले से भरे कई कमरों को अच्छे बनाकर और उनके भी पीछे रिक्त पड़ी जगह में नए भवन बनाकर पूर्ति की जा सकती है।
विकेंद्रीकरण का आरोप : जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष पी.के. शुक्ला का कहना है यह कोर्ट का विकेंद्रीकरण है जो परोक्ष रूप से कोर्ट बिचौली हप्सी ले जाने के लिए दबाव है। वैसे ही परिवार न्यायालय जिला कोर्ट परिसर के बजाय जावरा कंपाउंड में सालों से है। कुछ वर्ष पहले परिवार न्यायालय गांधी हॉल के पास नाप तौल विभाग के सामने खाली जमीन में बनाना प्रस्तावित था जो ठंडे बस्ते में है।
साथ ही वर्तमान जिला कोर्ट परिसर में प्रेस क्लब के सामने वाले गेट से रेलवे न्यायालय के बीच गुमटियां हटाकर उनके स्थान पर नया भवन बनाने की भी योजना पांच साल पहले बनी थी किंतु वह भी ठंडे बस्ते में चली गई। श्री शुक्ला का कहना है जगह की पूर्ति वर्तमान कोर्ट परिसर में ही बहुमंजिला भवन बनाकर की जाए। तब तक नई कोर्ट एमटीएच कंपाउंड में पालिका प्लाजा में ले जाई जाना चाहिए क्योंकि यह जिला न्यायालय के पास है।
बिचौली हप्सी की योजना ठंडे बस्ते में : एमपी हाउसिंग बोर्ड, इंदौर ने 2002 में पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत शहर से लगे बिचौली हप्सी में नई कोर्ट की योजना बनाई थी। इसकी डिजाइन भी बन गई थी। बोर्ड के संभागीय वृत के उपायुक्त शरद आर. पवार का कहना है अभिभाषकों के विरोध के कारण योजना आगे नहीं बढ़ी। योजना फिलहाल बोर्ड के विचाराधीन नहीं है।
‘ अभी कहीं भी जगह तय नहीं हुई है। नई कोर्ट के लिए किराए के भवन की व्यवस्था अस्थाई है क्योंकि जिला कोर्ट परिसर में नए भवन बनाने में काफी वक्त लग सकता है। बढ़ते लंबित प्रकरणों पर अंकुश पाने के लिए नई कोर्ट जल्द चालू करना जरूरी है।’
मनोहर ममतानी, विशेष न्यायाधीश जिला कोर्ट।