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हमारी कोई नहीं सुनता

बीकानेर. सैनिक कल्याण मंत्री रामनारायण डूडी को समस्याएं बताई थी। प्रेमसिंह बाजौर अपनी डायरी में नोट करके ले गए थे लेकिन अफसोस है कि कोई कार्रवाई नहीं हो पाती। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल कुंवर चिमनसिंह ने गुरुवार को बीकानेर गौरव सेनानी रैली को संबोधित करते हुए अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने दुख प्रकट करते हुए कहा कि देश की रक्षा में अपनी जान तक लुटा देने वाले सैनिकों की सरकार को कोई परवाह नहीं है।

वर्ष 1997-98 के बाद अब तक प्रदेश स्तर पर रैली नहीं हुई। इस रैली में राज्य सरकार में शामिल होने के लिए मंत्री को लिखा था। सोल्जर बोर्ड के निदेशक को भी लिखा था लेकिन कोई नहीं पहुंचा। यहां तक कि जिला कलेक्टर ने भी व्यस्तता बताते हुए असमर्थता जाहिर कर दी, जबकि जिला सैनिक कल्याण बोर्ड का कलेक्टर अध्यक्ष होता है।

चिमनसिंह ने कहा कि राजस्थान वीरों की भूमि है। देश की रक्षा के लिए अब तक पता नहीं कितने ही रणबांकुरे शहीद हो गए लेकिन जब लाभ देने की बात आती है तो सरकारें आंखें मूंद लेती है। एक मेजर जनरल रेंक से रिटायर अधिकारी को लूणकरणसर तहसील में अपमान सहना पड़ता है तो आम पूर्व सैनिक को किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता होगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

राजस्थान की सरकार को अन्य राज्यों से सबक लेना चाहिए। इस अवसर पर पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भी संबोधित किया। अतिरिक्त कलेक्टर (प्रशासन) आर.पी.मिश्रा ने पूर्व सैनिकों की समस्याओं को सुनने के बाद कलेक्ट्रेट में एक सैनिक प्रकोष्ट स्थापित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि जिले के पूर्व सैनिक कभी भी उनके समक्ष अपनी समस्या लेकर आ सकते हैं।

शहर में शहीद स्मारक और ओलंपियन टावर के निर्माण 15 अगस्त तक करवाने का आश्वासन भी दिया तथा कहा कि नगर विकास न्यास दस हजार मकानों की एक कॉलोनी प्लान कर रहा है, जिसमें पूर्व सैनिकों को भी स्थान देने पर विचार किया जा रहा है।

जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर असलम खान ने पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए किए जा रहे कार्यो की जानकारी दी। पूर्व सैनिकों की समस्याएं भी सुनी गईं। सैनिकों की सुविधा के लिए रैली में विभिन्न विभागों की स्टालें भी लगाई गई।





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