HomeNewsRajasthanKota Kota

लेनदेन के विवाद में ‘राजहंस’

कोटा.bus सड़कों पर गुरुवार को भी राजहंस नजर नहीं आई। संभवत: अब इसके भविष्य का फैसला 14 फरवरी को होने वाली बैठक में होगा। राजहंस संचालकों का कहना है कि उन्हें लम्बे अरसे से विज्ञापन और बस पास का भुगतान नहीं मिला है। इस वजह से उनकी आर्थिक व्यवस्थाएं लड़खड़ा गई हैं। उधर, जिला प्रशासन की ट्रांसपोर्ट कंपनी ने बस संचालक पर टैंडर की अवहेलना करने का आरोप लगाया है।

उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा गठित कोटा सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लि. की ओर से शहर में राजहंस बसों के संचालन को ठेका एक कंपनी को दिया था। इस कंपनी ने एक साल में 12 बसों का संचालन शुरू किया, जबकि, उसे 36 बसों का संचालन करना था। इस संबंध में पूछे जाने पर बस कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि विज्ञापन और पास की बकाया राशि के भुगतान के बिना बसों का संचालन नहीं किया जा सकता।

इस वजह से उन्होंने सभी बसों को डिपो में खड़ा कर दिया है। बसों के चालक व कंडेक्टरों को भी कहा गया है कि बसों के संचालन से इतनी आय नहीं हो रही है कि उनकी तनख्वाह चुकाई जा सके।

वहीं, जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार बस संचालक के खिलाफ बैंक लगातार शिकायत कर रहे हैं। अगस्त के बाद से संचालक ने यात्रियों से वसूल किए जाने वाला यात्री भाड़ा भी जमा नहीं कराया है। संचालक से कहा गया था कि वह बसों का संचालन बंद नहीं करे, लेकिन फिर भी उसने बसों का संचालन रोक दिया।

शर्र्तो का उल्लंघन

बस संचालक ठेका शर्र्तो का उल्लघंन कर रहा है। उसने बैंकों की किश्त भी जमा नहीं कराई। यदि उसने अनुबंध तोड़ा उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
—एलएन मीणा, सीईओ नगर निगम

उलझा लेनदेन का झमेला

बसों पर विज्ञापन और यात्रीपास बनाने का ठेका प्रशासन द्वारा गठित सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लि. की ओर दो अलग अलग फर्र्मो को दिया गया था। इसमें इंदौर की विज्ञापन ठेका फर्म को प्रतिबस 12 हजार रुपए सालाना का भुगतान करना था।

सर्विस लि. की ओर से अपना कमीशन काटकर शेष राशि बस ऑपरेटर को देनी थी। बस ऑपरेटर के अनुसार उसे विज्ञापन व पास की राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। उधर, सीईओ मीणा कहते हैं कि ऑपरेटर ने जानबूझकर बसों का संचालन रोका है।

बैंक का कितना बकाया

राजहंस बसों पर बैंक का करीब 9 लाख रुपए से अधिक बकाया बताया जा रहा है। यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है। इसी प्रकार बस ऑपरेटर पर करीब ढाई-तीन लाख रुपए चालकों व कंडेक्टरों का वेतन बकाया है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: