भोपाल. पेट की गंभीर बीमारियों की जांच के लिए शहर के कमला नेहरू अस्पताल में लगने वाले एक रोड़ रुपए के उपकरणों का मामला सरकारी खींचतान में उलझता जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि उपकरण खरीदने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग एवं लघु उद्योग निगम के अधिकारियों ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया है। ऐसे में शहर के लोगों को जांच की सुविधा से तो लंबे समय तक वंचित रहना ही पड़ेगा, उपकरण खरीदने के लिए आवंटित राशि डूबने का खबरा भी उत्पन्न हो गया है।
कमला नेहरू अस्पताल में जुलाई 2006 से पेट के अंदरूनी हिस्सों की जांच करने के लिए दो महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड और डबल बैलून एंट्रोस्कोपी सिस्टम खरीदे जाने की प्रक्रिया शुरु हुई थी। इन महत्वपूर्ण उपकरणों से आंत में कैंसर, छाले, ब्लीडिंग सहित पेट संबंधी विभिन्न बीमारियों की अत्याधुनिक तरीके से जांच करना संभव है। मप्र के किसी भी सरकारी अस्पताल में यह जांच उपकरण मौजूद नहीं है।
सूत्रों के अनुसार इन उपकरणों को खरीदने के लिए गैस राहत विभाग द्वारा लघु उद्योग निगम के खाते में राशि भी जमा कराई जा चुकी है। इसके साथ ही एक कंपनी का चयन इसकी सप्लाई करने के लिए कर लिया गया था लेकिन अतिम समय में मामला अटक गया। इसे उपकरण सप्लाई करने वाली दो कंपनियों के बीच की रस्साकशी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। जो भी हो इस रस्साकशी में शहर के लोगों को एक महत्वपूर्ण सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है।