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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. सेशन पूरा होने को है और पीयू के प्रोफेशनल कोर्स करवाने वाले ज्यादातर डिपार्टमेंट में इस बार स्टूडेंट को इस बार अभी तक अपॉइंटमेंट लैटर नहीं मिले हैं। वजह, ज्यादातर डिपार्टमेंट में अभी तक कैम्पस प्लेसमेंट पूरी ही नहीं हुई है। जिन डिपार्टमेंट में कंपनियां कैम्पस प्लेसमेंट का प्रॉसेस पूरा हो चुकी हैं, वहां कंपनियों की ओर से अभी तक स्टूडेंट्स को अपॉइंटमेंट लैटर ही नहीं मिले हैं।
पीयू के 5 दर्जन से ज्यादा डिपार्टमेंट में से करीबन डेढ़ दर्जन ऐसे बड़े डिपार्टमेंट हैं जहां हर साल सेशन पूरा होने से पहले लगभग आधे स्टूडेंट्स को पढ़ाई के दौरान ही कैम्पस प्लेसमेंट के जरिए नौकरियां मिल जाती हैं।
इन डिपार्टमेंट में कैमिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल, यूआईएलएस, यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी जैसे कई बड़े डिपार्टमेंट में हर हाल में जनवरी तक कैम्पस प्लेसमेंट का प्रॉसेस हो जाता था।
इन डिपार्टमेंट में जितने स्टूडेंट ने कैम्पस इंटरव्यू के जरिए प्लेसमेंट की इच्छा जताई थी, उनमें से 30 से 40 फीसदी स्टूडेंट का अभी कैम्पस इंटरव्यू भी नहीं हुए हैं। पिछले साल ज्यादातर डिपार्टमेंट में दिसंबर और जनवरी में यह प्रॉसेस पूरा करने के बाद स्टूडेंट को अपॉइंटमेंट लैटर मिल चुके थे।
यूबीएस के पिछले बैच 140 में से 134 को 18 दिसंबर, 2006 को अपॉइंटमेंट लैटर मिल चुके थे, लेकिन इस बैच को लेकर इस बार फरवरी शुरू होने के बाद भी यूबीएस की ओर से प्लेसमेंट पाने वाले स्टूडेंट की घोषणा तक नहीं की है। यही हाल, दूसरे बड़े डिपार्टमेंट्स का है।
देश भर से आते हैं स्टूडेंट
यूबीएस, यूआईईटी और कैमिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी जैसे डिपार्टमेंट में स्टूडेंट नेशनल लेवल पर होने वाले एंट्रेंस में कम्पीट करके एडमिशन लेने में कामयाब होते हैं, लेकिन इतने कड़े मुकाबले को पार करने के बाद भी समय पर कैम्पस प्लेसमेंट पूरी न करके इन स्टूडेंट के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगते हैं।
>> कुछ जगह प्लेसमेंट प्रोसेस जरूर लेट है लेकिन आगने वाले कुछ दिनों में इस प्रोसेस को पूरा कर लिया जाएगा। पीयू के सभी डिपार्टमेंट प्लेसमेंट प्रोसेस को पूरी गंभीरता से ले रहा है।
प्रो. आरसी बारी, रजिस्ट्रार, पीयू
क्या है नुकसान
देरी से प्लेसमेंट होने से स्टूडेंट को पढ़ाई से पहले अनिश्चितता के माहौल में रहना पड़ता है क्योंकि प्लेसमेंट प्रोसेस पूरा नहीं हुआ होता। बाद में प्लेसमेंट करने वाली कंपनियां बहुत ही कम पैकेज पर स्टूडेंट को प्लेसमेंट देती हैं क्योंकि देश के दूसरे इंस्टीट्यूट में पहले कैम्पस इंटरव्यू करके इन कंपिनयों के बड़ी और ज्यादा पैकेज देने वाली कंपनियां अपनी जरूरत पूरी कर लेती हैं। बाद में सिर्फ छोटे और कम पैकेज पर ही प्लेसमेंट होती है।