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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. केंद्रीय गृह मंत्रालय सोमवार को तय कर लेगा कि धुर नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ और झारखंड में फोर्स की भूमिका क्या होगी। सोमवार को गृह मंत्रालय पहली बार छत्तीसगढ़ के आला अफसरों से दिल्ली में सुरक्षा मामलों पर चर्चा करेगा। बैठक में राज्य के मुख्य सचिव शिवराज सिंह और डीजीपी विश्वरंजन शामिल होंगे।
सीआरपीएफ के पूर्व अफसरों की कमेटी ने केंद्र सरकार से सिफारिश की थी कि छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से लड़ाई के लिए सब मिलाकर (अद्धसैनिक बल और राज्य पुलिस) 70 बटालियनें होनी चाहिए। बस्तर में फोर्स का आंकड़ा सुरक्षा कारणों से गोपनीय रखा गया है। फिर भी, अफसरों का मानना है कि वहां राज्य और केंद्र की फोर्स को मिलाकर डेढ़ दर्जन बटालियनें भी नहीं हैं।
इनमें डीएफ और ला एंड आर्डर में लगी फोर्स भी शामिल है। इस फोर्स के साथ बस्तर के एक कोने में भी आपरेशन चलाना मुश्किल है। अफसरों का मानना है कि पूरे इलाके में आपरेशन चलाने के लिए जितनी फोर्स चाहिए, केंद्र से उतनी मिल पाना संभव नहीं है। इसीलिए राज्य ने तय किया है कि अलग-अलग इलाकों में मुहिम चलाई जाए और यह काम चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए।
राज्य के अफसर संभवत: रणनीति में इस बदलाव से केंद्र सरकार को अवगत कराने वाले हैं। यही वजह है कि पहले चरण में सिर्फ 8 बटालियनें मांगी जाएंगी। 5 बटालियनें भी मिल गईं तो दक्षिण बस्तर के बड़े इलाके में फोर्स नक्सल विरोधी आपरेशन चला सकती है।
बीएसएफ का मिलना कठिन
चुनावी वर्ष में सीआरपीएफ ने और बटालियनें देने में असमर्थता जता दी है। राज्य ने केंद्र से इसकी जगह बीएसएफ की बटालियनें मांगी थीं। बीएसएफ ने विचार के लिए एक हफ्ते का समय मांगा है। सूत्रों के अनुसार राज्य को बीएसएफ मिलना भी मुश्किल है, क्योंकि केंद्र सरकार का मानना है कि सीमा पर लड़नेवाली इस फोर्स को आंतरिक सुरक्षा में तैनात करना उचित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक सोमवार को राज्य के अफसरों को सूचित किया जा सकता है कि बीएसएफ नहीं दी जाएगी।