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शहर से जुड़े, बदहाली से घिरे

रायपुर.village नगर निगम सीमा से जुड़े 26 में से ज्यादातर गांव मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। दैनिक भास्कर टीम ने कुछ गांवों में दौरा कर लोगों से विकास के मुद्दे पर बात की तो वे फट पड़े। उनका कहना है कि चार साल में गांव के लिए एप्रोच रोड ठीक करने के अलावा कुछ नहीं किया जा सका। बोरियाखुर्द, डूंडा, सेजबहार, सड्डू, मोवा, लभांडी, लालपुर और फुंडहर जैसे गांवों में राजधानी कागजों में तो पहुंच गई, लेकिन विकास का अता-पता नहीं है।

ढाई साल में किसी भी गांव में नदी के मीठे पानी की लाइन नहीं बिछाई जा सकी। स्ट्रीट लाइट नहीं होने से सभी गांवों की सड़कें और गलियां रात में अंधेरे में डूबी रहने लगी हैं। घरों के भीतर लो वोल्टेज से लोग परेशान है। ज्यादातर गांवों में मिडिल स्कूल ही हैं। यहां के बच्चे आज भी हाई स्कूल की पढ़ाई या जरूरी टीकों के लिए दूसरे गांवों में जा रहे हैं।

फुंडहर की परेशानी अलग

एयरपोर्ट जाने वाली वीआईपी रोड से लगे 2500 की आबादी वाले फुंडहर गांव में गलियों का कंक्रीटीकरण अधूरा छोड़ दिया गया। यह काम गांव के निगम सीमा में आने से पहले मंजूर हुआ था। पूरे गांव की पानी सप्लाई आधा दर्जन बोर पर निर्भर है।

एक तरह से भाठा जमीन पर बसे इस गांव के बोर मार्च अंत तक सूखने लगे हैं। जब तक बोर में पानी नहीं आता, निगम गांवभर के लिए रोजाना एक ही टैंकर भेजता है। गांव में मिडिल स्कूल है। गांव के आउटर में दो हत्याओं के बाद लोग लड़कियां तो दूर, लड़कों को भी पढ़ाई के लिए बाहर भेजना नहीं चाहते।

ज्यादातर काम ठप

लालपुर गांव जगदलपुर नेशनल हाईवे के दोनों ओर है, इसलिए एप्रोच रोड की समस्या नहीं है, लेकिन भीतरी हिस्सा गंदगी से पटा हुआ है। गंदे पानी की निकासी के लिए अधबना नाला है। कोई सफाईकर्मी यहां से नहीं जाता, इसलिए लोगों ने खुद ही पैसे जमा कर सफाईकर्मी रख लिए। लोगों का कहना है कि चार साल में एक भी नई योजना नहीं बनी। पुरानी योजनाओं पर भी काम चालू नहीं हुआ। इनमें सड़क निर्माण, मिनी स्टेडियम, श्मशान घाट की दीवाल निर्माण, स्ट्रीट लाइट आदि काम ठप हैं।

कचरे का पहाड़

करीब 12 हजार की आबादी वाले बड़े गांव लभांडी में भी सबसे बड़ी समस्या सफाई की है। लोगों ने बताया कि निगम के सफाईकर्मी महीने में औसतन दो बार ही पहुंचते हैं। कचरा निकालकर बाहर डाल जाते हैं, फिर यह नहीं उठता। गांव में जगह-जगह कचरे का पहाड़ देखा जा सकता है। कचरे से निस्तारी तालाब बुरे हाल में पहुंच गए हैं। सतनामी मोहल्ले का तालाब इतना प्रदूषित है कि धोखे से पानी का इस्तेमाल कर लिया तो बीमारी तय है।

बोरियाखुर्द में एक सड़क

तकरीबन 2000 की आबादी वाले बोरियाखुर्द में विकास के नाम पर चार साल में पीडब्लूडी की सिर्फ एक सड़क बन पाई। गलियों में कंक्रीटीकरण नहीं हुआ। गंदे पानी के निकास के लिए नालियां नहीं हैं। पीने के पानी के लिए लोग कुएं और बोर के पानी पर निर्भर हैं। लोगों ने बताया कि अप्रैल शुरू होते ही दोनों बोर सूख जाते हैं और पूरी आबादी जबर्दस्त जलसंकट झेलती है। इस गांव में मरीजों का इलाज केवल एक जनरल प्रैक्टिशनर के हवाले है।

फुहारों में ही कीचड़

सेजबहार में हल्की बारिश में ही गलियों में इतना कीचड़ होने लगा है कि आना-जाना मुश्किल है। यहां भी चार साल में केवल डामर की एप्रोच रोड ही बनी है। गलियों में कंक्रीटीकरण का भूमिपूजन छह माह पहले स्थानीय विधायक तथा पीडब्लूडी राज्यमंत्री राजेश मूणत ने किया था, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। नालियां नहीं हैं, इसलिए मकानों से निकला गंदा पानी गलियों में बहने लगा है। गंदगी का आलम ये है कि कुएं और बोरिंगों के पास कचरे का ढेर लगा है।

गांवों में विकास के लिए पूरी ताकत झोंक दी। लोगों से बात करेंगे और कमियां फौरन दूर की जाएंगी। पिछले चार साल में बड़े पैमाने पर सड़कें-गलियां बनाई गईं। ज्यादातर स्कूलों की बाउंड्रीवाल का काम पूरा कर लिया गया।
—राजेश मूणत,पीडब्लूडी राज्यमंत्री

निगम ने ग्रामीण इलाकों में 17 करोड़ से ज्यादा के विकास कार्य मंजूर किए हैं। काम शुरू होने में देर हो सकती है, लेकिन काम होगा। सड़कों की हालत सुधरी है। पानी के लिए जल्द ही 17 बड़ी टंकियों का निर्माण शुरू होगा। बिजली के लिए ढाई करोड़ अलग से बजट में रखा गया। सफाईकर्मियों की संख्या दोगुनी कर दी गई।
—सुनील सोनी ,महापौर, नगर निगम





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