भोपाल. नेशनल चंबल सेंक्चुरी में घड़ियालों की मौत अबूझ पहेली बनी हुई है। घड़ियालों पर आई इस आफत की वैज्ञानिक वजह का अब तक खुलासा नहीं हो पाया है। अत्यंत दुर्लभ प्रजाति के इस जलजीव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल है। मौत का कारण जानने के लिए कई विदेशी विशेषज्ञों ने सेंक्चुरी में डेरा डाल दिया है। पहली बार किसी भारतीय चिकित्सक ने भी घड़ियाल के खून के नमूने लिए हैं।
घड़ियालों के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट की वजह जानने के लिए फ्लोरिडा विवि के पैथालॉजिस्ट ब्रिएन स्टेसी, वल्र्ड कंजर्वेशन यूनियन (आईयूसीएन) के उपाध्यक्ष फ्रित्ज हचरमेयर, ओसियन पार्क हांगकांग के पाओलो मार्टेली और फ्रांस के सेमुअल मार्टिन तमाम स्थानीय अधिकारियों के साथ सेंक्चुरी में हैं।
पाओलो मार्टेली और सेमुअल मार्टिन ने मुरैना के पास देवरी घड़ियाल पुनर्वास केंद्र में घड़ियालों के रक्त के नमूने जमा किए हैं। माधव नेशनल पार्क, शिवपुरी के डॉ. जितेंद्र जाटव ने भी इन विदेशी विशेषज्ञों से घड़ियाल के रक्त के नमूने लेने की सीख ली और नमूने भी लिए। वे पहले भारतीय पशु चिकित्सक बताए जा रहे हैं, जिन्होंने घड़ियाल के रक्त के नमूने लिए।
कारण की तलाश- मौत का कारण जानने के लिए मृत घड़ियालों के अवशेषों के नमूने जबलपुर वेटनरी कॉलेज, आईवीआरआई बरेली और आईटीआरसी लखनऊ भेजे गए थे।
बरेली की रिपोर्ट छह घड़ियालों के परीक्षण पर आधारित है, जिसके मुताबिक सीसे की अधिक मात्रा पाई गई है। लेकिन विदेशी विशेषज्ञों के साथ सेंक्चुरी में सक्रिय वल्र्ड कंजर्वेशन यूनियन के सदस्य आरजे राव ने भास्कर से कहा कि मौत का कारण सीसा नहीं है। यह सिर्फ अंदाजा है।
96 घड़ियाल मरे-अब तक 96 घड़ियाल मौत के शिकार हो चुके हैं। आठ दिसंबर 2007 से अब तक इनके मरने का सिलसिला जारी है। करीब 465 किमी लंबी सेंक्चुरी में लगभग 85 किमी के दायरे में घड़ियाल मारे गए हैं। चंबल के वन्यजीव शोधार्थी एसआर टैगोर ने भास्कर से कहा कि एक खास आकार और उम्र के घड़ियाल मौत का शिकार हो रहे हैं। प्रभावित इलाके में सतत् निगरानी की जरूरत है।
मौत के टारगेट पर
-मौत के शिकार घड़ियालों की उम्र छह से 11 साल के बीच और औसत लंबाई 250 सेंटीमीटर।
-मप्र में छह और उत्तरप्रदेश में 14 घड़ियालों का पोस्टमार्टम हुआ।
-सेंक्चुरी के प्रभावित इलाके से पानी के नमूनों की जांच ग्वालियर, आगरा और लखनऊ में हुई। गुणवत्ता बेहतर।
-भिंड और मुरैना प्रशासन के मुताबिक चंबल में कोई औद्योगिक या अन्य प्रदूषण नहीं।
- डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट एस्टब्लिशमेंट ग्वालियर को पानी, रेत और मिट्टी के नमूने परीक्षण के लिए भेजे जा रहे हैं।
>> ‘‘अब तक कोई वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है। विदेशी विशेषज्ञ खुद पोस्टमार्टम कर रहे हैं। उनके अनुसार किडनी डेमेज होने से मौत हुई है, लेकिन किडनी क्यों खराब हुई, यह पता नहीं चल पा रहा। यह तय है कि सीसा मौत की वजह नहीं है।’’
डॉ. आरजे राव, सदस्य, वल्र्ड कंजर्वेशन यूनियन
>> ‘‘पोस्टमार्टम से मौत की मूल वजह का खुलासा नहीं हो पाया है। अभी भी मृत घड़ियालों के अवशेषों की जांच का काम जारी है।
एचएस पावला, एपीसीसीएफ, वाइल्डलाइफ