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‘हाथी’ ने बनाए कितने साथी?

भोपाल. मध्यप्रदेश में पिछले छह महीने से चल रही बहुजन समाज पार्टी की सोशल नेटवर्किग का नतीजा रविवार को लाल परेड मैदान में नजर आएगा। यहां बसपा के समरसता सम्मेलन में शिरकत करने वाली उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती खुद नतीजे से रूबरू होगी।

उत्तरप्रदेश में जिस सोशल इंजीनियरिंग के चलते ‘बहुजन’ का हाथी सरकार पर सवार हुआ था, मध्यप्रदेश को भी उसकी प्रयोगशाला बनाने की कोशिश की जा रही है। बसपा सुप्रीमो मायावती की अगुवाई में प्रदेशभर से बसपा के कार्यकर्ता आ रहे हैं।

आगामी चुनाव में राज्य की सभी 230 विधानसभा सीटों पर बसपा मैदान में रहेगी। बसपा का हाथी यूपी से लगे विंध्य, चंबल और बुंदेलखंड की 102 विधानसभा सीटों पर सवार होने की विशेष तैयारी में हैं।

बुंदेलखंड में उमा भारती के भाजपा से अलग होने के बाद बसपा ने सोशल नेटवर्किग के लिए संभाग और जिलों में जो ब्राrाण और क्षत्रिय सम्मेलन किए थे उनके नतीजों की लाल परेड मैदान में नुमाइश होगी। सभी नेताओं में जोश भरने के लिए बसपा के नारे ‘जिस समाज की जितनी तैयारी उस समाज को उतनी हिस्सेदार्री’ ने सभी में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगा दी है। ऐसे में बसपा मप्र में दूसरी ताकत बनने के रास्ते पर है। हालांकि उसका दावा नंबर वन पार्टी बनने का है।

मध्यप्रदेश में बसपा का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। सन 1996 में सतना लोकसभा चुनाव में दिग्गज कांग्रेसी नेता अजरुन सिंह को हरा कर बसपा ने सबको चौंका दिया था।

इससे पहले सन 1993 में उसने राज्य विधानसभा की सात सीटों पर कब्जा किया। अगले विधानसभा चुनाव में 1998 में उसके विधायकों की संख्या 11 तक पहुंच गई। लेकिन इसके बाद पार्टी के लिए मुफीद समय नहीं रहा। पिछले चुनाव में उसे राज्य में महज दो सीटें मिल सकीं।

उप्र से बंधी उम्मीद
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भुजबल अहिरवार ने राज्य की सभी 230 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का एलान किया है। चुनाव के मद्देनजर गंभीर हुई पार्टी ने नया नारा ‘तिलक, तराजू और तलवार, इनसे होगा बेड़ा पार’ तैयार किया है।

इसी तरह सामाजिक समरसता का एक और नारा ‘हाथी नहीं गणोश है, ब्रrा-विष्णु-महेश है’ भी चल रहा है। सोशल इंजीनियरिंग यहीं तक नहीं थम रही। श्री अहिरवार का कहना है कि उप्र की तरह मप्र में भी अगड़ी जातियों के गरीबों को आरक्षण मिलना चाहिए।

उम्मीद का आधार
बसपा नेताओं का मानना है कि मप्र में समाजवादी पार्टी फूट की शिकार है। कांग्रेस में पहले जैसी बात नहीं रही और उमा भारती के जाने के बाद भाजपा भी कमजोर हो गई है।

ऐसे में बसपा के जीतने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। उप्र के श्रम मंत्री तथा पार्टी की मप्र इकाई के प्रभारी बादशाह सिंह का कहना है कि मप्र में बसपा चुनाव जीतेगी और अगले साल मायावती प्रधानमंत्री पद संभालेंगी।





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