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महिलाओं को पुरुष नहीं देते किडनी

जयपुर. किडनी की जरूरत जब-जब पड़ती है, माताओं को ही आगे आना पड़ता है। राजस्थान में जयपुर के एसएमएस अस्पताल में 1999 से किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू होने के बाद अब तक के रजिस्टर पर नजर डालें तो किडनी देने वाले खानों में ज्यादातर नाम महिलाओं के ही दिखाई देंगे। अब तक हुए 116 प्रत्यारोपण में 94 किडनी महिलाओं ने दी हैं। इनमें 52 माताएं थीं तो 24 पत्नियां और 16 बहनें।

मात्र 22 पुरुष किडनी देने आगे आए हैं। अब तक मात्र 9 महिलाओं को किडनी लगी हैं, इन्हें भी देने वाली 8 महिलाएं ही थीं। अब तक एकमात्र पुरुष ने अपनी विवाहिता बेटी को किडनी दी है। जल्द ही यहां चार और किडनी प्रत्यारोपित होनी हैं, ये चारों भी माताएं ही देने वाली हैं।

मां ही बनी आखिरी सहारा

38 वर्षीय आशीष बहल (परिवर्तित नाम) पेशे से मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव हैं। वे एक महीने से एसएमएस अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे थे। उनका ब्लड ग्रुप ए प्लस उनकी पत्नी के ब्लड ग्रुप बी प्लस से मैच नहीं करता था और वे अपने बच्चों संजना (19) और रोहित (17) से किडनी लेना नहीं चाहते थे। ऐसे में उनके पास विकल्प के रूप में मां-बाप और भाई-बहन ही बचते थे।

भाई के किडनी दान करने में उसकी पत्नी को एतराज था तो शादी-शुदा बहन की किडनी दान की इच्छा के बावजूद उसके ससुराल पक्ष ने मना कर दिया। जिंदगी बचाने के लिए अंतिम सहारे के तौर पर माता-पिता ही बचे। पिता रामेश्वर (परिवर्तित नाम) घर के मुखिया होने के नाते आर्थिक जिम्मेदारियां निभाते रहे। ऐसे में एकमात्र विकल्प के रूप में मां सरला देवी सामने र्आई।

सारी स्थितियों के बावजूद आशीष इस उधेड़बुन में थे कि क्या उनका यह निर्णय सही होगा? अपनी जिंदगी के खातिर वह बूढ़ी मां को परेशानी में डाले? लेकिन, उसकी मां किसी बात की परवाह किए बिना बेटे की जिंदगी की ढाल बनकर खड़ी हो गई।

देकर भी खुश : एसएमएस में कुछ समय पूर्व हुए किडनी प्रत्यारोपण के इस केस को याद करते हुए नेफ्रोलॉजी विभाग के सह आचार्य विनय मल्होत्रा कहते हैं कि आशीष को किडनी प्रत्यारोपण के बाद भी उसे उतनी खुशी नहीं हुई, जितनी उस बूढ़ी मां को जिसका लाल फिर से महीनों बाद खड़ा हो पाया था।

महिलाओं को भी महिलाओं का सहारा : महिलाओं को किडनी देने के 9 मामलों में 8 बार महिलाएं ही आगे आई हैं। इनमें भी चार तो माताओं ने बेटियों को किडनी दी वहीं तीन बहनों ने अपनी बहन की जान बचाई। एक बार सास भी बहू को जिंदगी देने आगे आई। किडनी दान के सभी मामलों में सिर्फ एक बार मई-2005 में एक पिता ने अपनी विवाहिता बेटी को किडनी दान की थी।

किडनी प्रत्यारोपण के मामलों पर गौर करने से पता चलता है कि जब सभी नजदीकी रिश्तेदार किडनी दान के नाम पर पीछे हट गए, तो माताएं ही जिंदगी की ढाल बनकर खड़ी हो गई। नियमानुसार किडनी प्रत्यारोपण के लिए मां-बाप, भाई-बहन, पुत्र-पुत्री और पति-पत्नी ही आपस में दान कर सकते हैं। अन्य दानदाता होने की स्थिति में मामला ‘ऑथोराइज्ड कमेटी’ के पास चला जाता है। इस चार सदस्यीय कमेटी में राज्य सरकार के डायरेक्टर मेडिकल, एसएमएस अस्पताल के प्रिंसिपल के अलावा यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख होते हैं।

हर महीने औसतन 3 केस

एसएमएस अस्पताल में राज्यभर के मरीज किडनी प्रत्यारोपण के लिए आते हैं। फिलहाल यहां महीनेभर में औसतन 3 किडनी लगाई जाती हैं। नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. एलसी शर्मा के अनुसार किडनी प्रत्यारोपण पर लगभग 50 हजार रुपए खर्चा आता है, जो अन्य जगहों की अपेक्षा काफी सस्ता है। साथ ही बीपीएल मरीजों के अलावा जो लोग टैक्स भरने योग्य नहीं है उनको भी राज्य सरकार की ओर से किडनी दानदाता तैयार होने की स्थिति में निशुल्क प्रत्यारोपण किया जाता है।

एक नजर

एसएमएस अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण नवंबर 1999 से शुरू,कुल किडनी प्रत्यारोपण: 116,पुरुष दानदाता-22,महिला दानदाता-94,महिला दानदाताओं में: मां (52), पत्नी (24), बहन (16), बुआ (1), सास (1),पुरुष दानदाताओं में: पिता (11), भाई (10), चाचा (1)

केडेबर ट्रांसप्लांट बढ़े तो बात बने

किडनी के मरीज बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन इसके दानदाता बेहद कम हैं। हालांकि इसके लिए विदेशों की तर्ज पर देश के मेट्रो शहरों में ‘केडेबर ट्रांसप्लांट’ शुरू हो चुका है। लेकिन एसएमएस अस्पताल में फिलहाल एक भी ऐसा मामला सामने नहीं आया है। यह कहना है एसएमएस अस्पताल के नेफ्रोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. एलसी शर्मा का।

क्या है केडेबर ट्रांसप्लांट

केडेबर ट्रांसप्लांट वह है जब मरीज के बचने की कोई स्थिति नहीं होती, तो उसके परिजनों की स्वीकृति से अंतिम समय में उसकी सुरक्षित किडनी निकाल ली जाती है।

कहां कितना खर्चा

एसएमएस अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण पर 50 हजार रुपए का खर्चा आता है, जबकि निजी अस्पताल में यह खर्चा दो से ढाई लाख रुपए तक आता है। दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में 2 लाख रुपए का खर्चा आता है। विदेशों में किडनी प्रत्यारोपण में लगभग 10 लाख का खर्चा आता है।





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