इंदौर. एमवाय अस्पताल में गंदगी व खटमल से तंग आकर एक डॉक्टर ओपीडी छोड़ने को विवश हो गए। अधीक्षक को सूचना दी, दरवाजे पर नोटिस लगाया और ओपीडी से रवाना हो गए। इससे काफी देर तक मरीज परेशान होते रहे। बाद में उन्होंने चेम्बर में मरीजों को देखा।
ओपीडी मेडिसिन विभाग में शुक्रवार को एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरुण विश्नार की ड्यूटी थी। सुबह साढ़े नौ बजे से उन्होंने मरीजों को देखना शुरू किया लेकिन करीब 11 बजे गंदगी और खटमलों के आगे उनका धैर्य जवाब दे गया।
उन्होंने अधीक्षक डॉ. सी.वी. कुलकर्णी को लिखित शिकायत की और कक्ष के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया ‘गंदगी और खटमलों के कारण बाह्य रोग मेडिसिन विभाग कंसल्टेंट कक्ष को बंद करना पड़ा। अधीक्षक को सूचित का दिया गया है।’
नोटिस पढ़कर मरीज काफी देर तक परेशान होते रहे। बाद में किसी ने असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजेश वर्मा को दिखाया तो कुछ डॉ. विश्नार को खोजते रहे। बाद में डॉ. विश्नार ने बेसमेंट स्थित चेम्बर में मरीजों को देखा।
उधर, जब इसकी सूचना अधीक्षक कार्यालय को मिली तो तत्काल सफाई ठेकेदार रेखा बिड़कर को तलब किया। उन्होंने ताबड़तोड़ कक्ष के फर्नीचर में कीटनाशक डालवाई और साफ-सफाई कराई।
गंदगी और अव्यवस्था के कारण ही पिछले महीने मुख्यमंत्री ने डीन को सस्पेंड किया था। इस घटना से जाहिर है कि अस्पताल की व्यवस्था में इस कार्रवाई का कोई असर नहीं हुआ है। इस बारे में अधीक्षक डॉ. कुलकर्णी ने बात करने से इंकार कर दिया।
एक साल से कर रहा हूं शिकायत -डॉ. विश्नार
डॉ. विश्नार ने भास्कर को बताया- ओपीडी में गंदगी व खटमलों की शिकायत एक साल से कर रहा हूं। सिस्टर इंचार्ज के माध्यम से कई चिट्ठियां लिखीं और व्यक्तिगत तौर पर दो-तीन बार ठेकेदार को कहा लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला तो हारकर यह कदम उठाना पड़ा।
हां, ओपीडी में खटमल हैं
शनिवार को ही ओपीडी में फिजियोथैरेपी के पास बने कक्ष में बैठे डॉ. राजेश वर्मा, कमरा नंबर-चार में बैठे डॉ. योगेंद्र जमरा ने भी कहा ओपीडी में खटमल हैं, जिनसे लंबे समय से परेशान हैं।
खुजली का इलाज कराने लगे
मेडिसिन विभाग के एक वरिष्ठ डॉक्टर को पैर में खुजली होने लगी। परेशानी बढ़ी तो उपचार शुरू कर दिया। बाद में पता चला समस्या ओपीडी के खटमलों के कारण हैं। संपर्क करने पर वे इतना ही बोले हमें इस बारे में कोई बयान देने को मना किया है।
शिकायत तो मिली है
असिस्टेंट सर्जन डॉ. एन.सी. जोशी ने बताया डॉ. विश्नार की शिकायत मिलने के बाद सफाई ठेकेदार को बोल दिया है। कीटनाशक डलवा देंगे। रविवार को कक्ष बंद रहेगा इसलिए असर भी अच्छा होगा।
अव्यवस्था के खटमल
अमूमन रोजाना दोपहर एक बजे बाद अस्पताल जूनियर डॉक्टरों के हवाले हो जाता है।
कर्मचारी बिना चाय-पानी मरीज को ऑपरेशन थियेटर से वार्ड तक नहीं पहुंचाते।
लिफ्ट से मरीजों को वार्ड तक पहुंचाने के लिए लंबा इंतजार करना होता है। कई बार लिफ्ट का दरवाजा ठोकने पर होती है सुनवाई।
मुख्यद्वार बंद ही रहता है, सर्जिकल आईसीयू के पास वाला छोटा दरवाजा भी बंद कर दिया गया है। पानी के लिए लोगों को लंबा चक्कर लगाकर बाहर बने प्याऊ तक जाना पड़ रहा है।