उदयपुर. अमेरिका जैसे विकसित देशों के दबाव में पेटेंट कानून में संशोधन तथा कॉपीराइट्स, ट्रेडमार्क के नियमों में बदलाव के परिणाम भारतीयों को भुगतने होंगे। इसका भरसक विरोध पेसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में 14 से 16 फरवरी तक होने वाली नेशनल कांफ्रेंस में किया जाएगा।
बौद्धिक संपदा अधिकारों पर आधारित इस कांफ्रेंस में देश के जाने माने अर्थशास्त्री एवं विशेषज्ञ भाग लेंगे। सेमीनार के निदेशक प्रो. भगवती प्रसाद ने यह जानकारी शनिवार को पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि सेमीनार में 77 प्रतिभागी विचार रखेंगे जिनमें से 20 स्थानीय होंगे। कोलकाता के धनपत अग्रवाल, मुंबई के नरेंद्र जवेरी, दिल्ली के गोपकुमार, श्रीमती कस्तूरी दास, बैंगलुरु के बीएम कुमार स्वामी तथा प्रो. अश्विनी महाजन का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
सेमीनार की सचिव डा. हर्षिता श्रीमाली ने बताया कि इस आयोजन में पेसिफिक मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के साथ अखिल भारतीय तकनीकी अनुसंधान परिषद का भी सहयोग रहेगा। प्रो. शर्मा ने बताया कि बौद्धिक संपदाओं में पारंपरिक हानि एक महत्वपूर्ण विषय है। भारत के पारंपरिक ज्ञान के आधार पर अनेक प्रकार के पेटेंट किए जा रहे हैं जो नए आविष्कार नहीं हैं। मसलन बासमती चावल हिमालय की तराई क्षेत्र का प्रोडक्ट है।
लंगड़ा आम बनारस का तथा नमकीन भुजिया बीकानेर के प्रोडक्ट माने जाते हैं। इनका अमेरिका में उत्पादन निषिद्ध किया जाना चाहिए व पेटेंट नहीं लेने देना चाहिए। पेसिफिक इंस्टीट्यूट की जनसंपर्क अधिकारी नीरू जैन ने बताया कि सेमीनार का उद्घाटन 14 फरवरी को सुबह 10 बजे देबारी स्थित पेसिफिक कॉलेज में होगा।