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माल नहीं बेचा तो वेतन चुकाना मुश्किल

कोटा.company अरफात पेट्रो केमिकल्स उद्योग की बंद इकाइयों में बेकार पक्के माल सहित अन्य सामान को नहीं बेचा गया तो श्रमिक-कर्मचारियों को वेतन देना मुश्किल होगा। अरफात के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एस. यू. खान ने शनिवार को पत्रकारों से कहा कि कंपनी की हालत काफी खस्ता है।

कंपनी का तमाम खर्चा हर माह करीब 70 लाख है। करीब 375 श्रमिक, कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन पर ही लगभग 40 लाख रुपए का भुगतान करना पड़ता है। एक्रेलिक फाइबर प्लांट के पोलीमर सेक्शन में आग लग जाने से उत्पादन ठप पड़ा है।

कंपनी ने 14 दिसंबर तक श्रमिकों व स्टाफ को वेतन का भुगतान किया। इसके बाद 55 फीसदी वेतन का भुगतान किया जा रहा है। खान ने कहा कि एक्रेलिक फाइबर प्लांट को छोड़कर उद्योग की बंद पड़ी इकाईयों की अधिकांश मशीनरी बेकार हो चुकी है।

इसकी वास्तविक हालत, उत्पादन क्षमता तथा बाजार में माल की खपत का भविष्य पता लगाने के लिए इंग्लैंड की कंपनी ‘मॉटमेक डोनाल्ड’ से सर्वे कराया जा रहा है। दो माह पूर्व कंपनी की टोली सर्वे कर चुकी है। मार्च तक फाइनल रिपोर्ट आने की उम्मीद है। इसके बाद ही बंद इकाइयों को चालू करने का निर्णय होगा।

माल हमारा, कुछ भी करें
खान ने कहा कि जेके सिंथेटिक्स लिमिटेड के कोटा स्थित पांचों प्लांट और सभी संपत्तियां खरीदने के बाद अरफात कंपनी संवैधानिक तौर पर इसकी मालिक है। सामान बेचें या कुछ भी करें, इसमें किसी को आपत्ति क्यों है। जेके के समय माल और बेकार स्क्रेप पड़ा हुआ है।

मशीनरी को बाहर ले जाने के आरोप निराधार हैं। प्रबंधन ने पारदर्शिता बरतते हुए जिला कलेक्टर से आग्रह किया था कि प्लांटों की मशीनरी की वीडियोग्राफी-फोटोग्राफी करा ली जाए। इसकी क्रियान्विति के लिए शुक्रवार को कलेक्टर ने समिति का गठन किया।





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