हिसार.
रसोई गैस वितरण के मामले में जिला प्रशासन की कार्यनीति पूरी तरह से फेल हो गई है। पूरे जिले में लोग गैस वितरण नीति की खामियों से परेशान हैं लेकिन जिले के अधिकारी बैठकों में बड़े-बड़े दावों के सिवा कुछ नहीं कर पा रहे हैं।
हर घर से जुड़ी इस समस्या ने मुख्य रूप से महिलाओं को परेशान कर रखा है। लोग हल्ला मचा-मचाकर थक गए लेकिन प्रशासन के सामने उनकी आवाज नक्कारखाने में तूती बन कर रह गई है। वे प्रशासन को कोसते हुए हालात से समझौता कर ब्लैक में गैस लेकर आर्थिक हानि उठा रहे हैं। जिले में काफी समय से जारी घरेलू गैस की किल्लत पर नजर दौड़ाने के लिए हिसार, हांसी, नारनौंद, उकलाना, अग्रोहा और आदमपुर में उपभोक्ताओं, गैस एजेंसी मालिकों और जिले के खाद्य आपूर्ति नियंत्रक विभाग के अधिकारियों से बात की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। उपभोक्ताओं ने जहां बुकिंग करने के बावजूद 20 से 30 दिन तक गैस नहीं मिलने की बात कहीं, वहीं 450 से 550 रुपए में सिलेंडर कभी भी मिल जाने के बारे में भी बताया।
उकलाना में 600 रुपए दो लाइन से बचो
उकलाना.
क्षेत्र के उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर लेने के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। लाइन से बचने के लिए एक सिलेंडर के 600 रुपए कालाबाजारी करने वालों को देना पड़ता है।
घरेलू उपभोक्ताओं को छूट पर दी जाने वाले इन सिलेंडर का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग भी हो रहा है। हलवाइयों, रेस्टोरेंट, ब्याह, शादियों और रेहड़ियों आदि पर घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग खुलकर हो रहा है।
कालाबाजारी भी बहुत ज्यादा हो रही है। एजेंसियों पर बेशक गैस लेने के लिए लंबी लाइन लगानी हो लेकिन 600 रुपए देने पर गैस सिलेंडर घर पहुंच जाता है। क्षेत्र में एक दो बार छापामारी भी हुई लेकिन ब्लैक पहले की तरह धड़ल्ले से चल रही है। गैस एजेंसी संचालक राजेंद्र कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
आदमपुर में खुलेआम ब्लैक
आदमपुर.
क्षेत्र के करीब 7200 शहरी व ग्रामीण उपभोक्ताओं को सप्लाई देने के लिए महीने में 20 गाड़ियां आती हैं। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को गैस आसानी से नहीं मिल पाती।
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के सामने मित्तल मार्केट, रेलवे स्टेशन के सामने, पोस्ट ऑफिस के सामने, मेन बाजार, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के पास और हाई स्कूल के सामने गैस सिलेंडर ब्लैक में 550-600 रुपए के हिसाब से खुलेआम कभी भी लिए जा सकते हैं। हालांकि श्याम गैस एजेंसी के मैनेजर भागमल ने बताया कि उपभोक्ताओं को नियमित और सही समय पर गैस दी जा रही है।
अग्रोहा वाले आते हैं हिसार
अग्रोहा.
अग्रोहा को ब्लॉक के बाद अब तहसील का दर्जा मिलने की संभावना है लेकिन यहां के लोग गैस सिलेंडर लेने के लिए हिसार और फतेहाबाद पर आश्रित हैं। हालात यह है कि अग्रोहा में एक भी गैस एजेंसी नहीं है जिसके कारण कालाबाजारी करने वालों पर ही आश्रित रहना पड़ता है।
क्षेत्र के नागरिक हरबंस लाल चुघ, सत्यवान किरमारा, राजपाल ढाका, पवन सेन, बबलू गोदारा, भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में एजेंसी न होने के कारण यहां पर 500 से 600 रुपए में एक सिलेंडर ब्लैक में मिल रहा है, जिसे खरीदना मजबूरी है। गैस के लिए हिसार, फतेहाबाद व बरवाला के चक्कर लगाने पड़ते हैं। महीने में कई-कई दिन गैस चूल्हे जलते भी नहीं है।
नारनौंद में लगती है घंटों लाइन
नारनौंद.
करीब एक लाख की आबादी वाले नारनौंद क्षेत्र में तीन गैस एजेंसी होने के बावजूद इस बार गैस की किल्लत जोरों पर है। लोगों को घंटों लाइनों में लगने के बाद भी गैस नहीं मिल रही है। हालांकि 400 से 500 रुपए में गैस का सिलेंडर आसानी से ब्लैक में मिल जाता है। 21 दिन में हर उपभोक्ता को गैस देने के नियम के बावजूद स्थिति यह है कि हर उपभोक्ता को एक माह में भी एक गैस सिलेंडर नहीं मिल पाता।
शहीद पवित्र सिंह गैस एजेंसी के संचालक किताब सिंह फौजी ने बताया कि उनके पास 7100 गैस उपभोक्ता है और प्रतिमाह वे 4800 गैस सिलेंडर की सप्लाई कर रहे हैं। नवभारत गैस एजेंसी संचालक अनिल दुहन ने बताया कि उनके पास आठ हजार 36 उपभोक्ता हैं। इन दिनों गैस की किल्लत के कारण प्रतीक्षा सूची चल रही है।