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अचल संपत्ति को चाहिए कर रियायत

मुंबई: अचल संपत्ति उद्योग मानता है कि जब budgetबजट काफी रियायतें लेकर आने वाला है तो वह कंस्ट्रक्शन उद्योग और बिल्डरों को कर रियायतें जरूर देगा। छोटे मकानों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए कर रियायत फिर देने की मांग की जा रही है। घर का सपना: केंद्र ने शहरी हदबंदी कानून खत्म करके बड़ा फैसला किया लेकिन किराया नियंत्रण कानून ने बिल्डरों को छोटे मकान बनाने से रोक रखा है। मकान मालिकों को पूरे मकान की लागत की पांच फीसदी रकम स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्री में चुकानी पड़ती है।

पार्कलेन प्रापर्टीज के एमडी अक्षय कुमार का कहना है कि काफी नीतियां अब भी राज्यों के हाथ में हैं, लेकिन जिस तेजी से जमीन की कीमतें बढ़ रही हैं और ब्याज दरें भी ऊंची हैं, स्टैंप ड्यूटी तर्कसम्मत होनी चाहिए।

अब एक बैडरूम के मकान की मांग घट गई है। पिछले साल तक छोटे मकान बनाने वालों को करों में छूट हासिल थी। मेट्रो में 1000 वर्ग फुट और नान मेट्रो में 1500 वर्ग फुट तक के मकानों को छूट हासिल थी। अब यह छूट नहीं है, तो बिल्डरों की छोटे मकानों से दिलचस्पी खत्म हो गई।

व्यावसायिक संपत्ति: रीयल इस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट) को तब तक सफलता नहीं मिलेगी, जब तक करों में रियायत नहीं दी जाती। नाइट फ्रेंक के चेयरमैन प्रणय वकील का कहना है कि अमेरिका में जब ऐसे ही रीट को कर रियायत मिली तो उनकी संख्या तेजी से बढ़कर 700 हो गई थी।

दुनिया की कंपनियां भारत आना चाहती हैं, लेकिन देश में दफ्तरों के इस्तेमाल वाली जगहों का भारी अभाव है। व्यावसायिक अचल संपत्ति की लीजिंग पर सर्विस टैक्स ने भी इसकी लागत बढ़ा दी है।

अजमेरा समूह के एमडी रजनीकांत अजमेरा का कहना है कि प्रापर्टी लीजिंग को सर्विस टैक्स से बाहर करना चाहिए। करीब 75 फीसदी व्यावसायिक संपत्ति आईटी या आईटी आधारित सेवाओं के पास है।

उद्योग को क्या चाहिए: अचल संपत्ति उद्योग को सीधे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की जरूरत है। आर्बिट कापरेरेशन के पुजित अग्रवाल की राय है कि सरकार को उद्योग के लिए तीन साल की योजना बनानी चाहिए। हमें पता होना चाहिए कि केंद्र इस क्षेत्र के लिए क्या करेगा।

नीलकंठ समूह के प्रवर्तक मुकेश पटेल का कहना है कि सरकार सीमेंट, सरिया आदि की कीमतों पर तो काबू नहीं कर सकी, लेकिन उपलब्धता तो आसान कर सकती है।





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