HomeVichaar Vichaar

अपने फायदे के लिए नियम न बदलो

लीडरशिप मंत्र. इस किस्से को मैं जीवन भर नहीं भूल सकता। मेरी चाची ने मुझे यह किस्सा 7-8 वर्ष पूर्व बताया था, जो कि उनके ही स्कूल में घटा था। उनके मुताबिक एक दिन जब प्रिंसिपल राउंड पर थे तो उन्हें स्कूल के एक बदमाश लड़के ने बाथरूम में बंद कर दिया। उधर, कई गणमान्य नागरिक और अभिभावक उनका इंतजार कर रहे थे।

जब काफी देर तक वे नहीं पहुंचे तो उनकी खोज शुरू हुई। करीब घंटे भर बाद चपरासी को एक बाथरूम का दरवाजा भड़भड़ाने की आवाज सुनाई पड़ी। तब कहीं जाकर उन्हें बाथरूम से निकाला जा सका। बाहर आने के बाद वह बाथरूम के पास स्थित क्लास में गए और छात्रों से बोले, ‘मैं जानता हूं कि इसी क्लास के एक छात्र ने मुझे बाथरूम में बंद किया था। अगर आप सच बोल दोगे तो ईश्वर भी आपकी गलती क्षमा कर देगा और बदले में टॉफी भी देगा।’ यह सुनकर एक छात्र खड़े होकर बोला, ‘सॉरी सर! आइंदा से ऐसी गलती मैं कभी नहीं करूंगा।’ यह सुनते ही प्रिंसिपल को गुस्सा आ गया और उन्होंने उस छात्र को मारने के लिए बेंत उठा लिया।

लेकिन उनके आश्चर्य का तब कोई ठिकाना नहीं रहा जब क्लास टीचर ही ने उन्हें रोक दिया और कहा,‘अगर आज आपने इस बच्चे को सजा दे दी, तो यह जिंदगी में अपनी गलती कभी स्वीकार नहीं करेगा।’ यह कह टीचर ने बच्चे को टॉफी अलग से दी।

हममें से अधिकांश उस प्रिंसिपल की ही तरह होते हैं। हम नियम-कायदों से तभी तक बंधे रहते हैं जब तक फायदा हो रहा हो। जब हमें लगता है कि हम अपने लक्ष्य तक पहुंच गए, तो हम उन्हीं नियम-कायदों को अपने लाभ के लिए बदलने लगते हैं। हमेशा ध्यान रखें कि अपने अहं को संतुष्ट करने के लिए नियमों को कतई न बदलें। टीम में विश्वास की भावना पैदा करना मुश्किल होता है, लेकिन उसे तोड़ना बहुत हीआसान।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: