भोपाल.
बसंत की शुरुआत माघ महीने की शुक्ल पंचमी से होती है। इस दिन को बुद्धि, ज्ञान और कला की देवी सरस्वती की पूजा-आराधना के दिन के रूप में मनाया जाता है। मौसमी फूलों और फलों और चंदन से सरस्वती पूजा की जाती है। सरस्वती को अच्छे व्यवहार, बुद्धिमत्ता, आकर्षक व्यक्तित्व, संगीत का प्रतीक भी माना जाता है।
महिलाओं के लिए खास
सरस्वती को प्रसन्न रखने के लिए महिलाएं किसी तरह की कमी नहीं रखतती हैं। वे पीले वस्त्र धारण करती हैं। माथे पर हल्दी का टीका तथा पीली चूड़ी व पीले फूल का गजरा विशेष होता है। इस दिन सूर्य कुंभ राशि में प्रवेश करता है, इसे मधु मास भी कहते हैं। जगह-जगह अरंडी (बगरंडा) की लकड़ी गाड़ी जाती है और उसी स्थान पर होलिका दहन होता है।
वैज्ञानिक कारण
यह ऋतु हमें आहार और पहनावे में बदलाव का संकेत देती है। बसंत आते ही शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत होती है। शरीर में हार्मोनों के बदलाव के कारण कामुक इच्छाएं पैदा होती हैं। यही वजह है कि इसे प्रेम और मिलन का मौसम भी कहा जाता है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में कच्चे आम के गूदे से शरीर की मसाज करना फायदेमंद होता है। इसे खाने से सर्दी, कफ की शिकायत भी दूर की जा सकती है। यह रक्त की अशुद्धियों को भी दूर करता है।
उत्सव एक अंदाज अनेकदेश के विभिन्न क्षेत्रों में बसंत पंचमी का अलग-अलग महत्व है। उप्र और बिहार में महिलाएं सरस्वती की पूजा करती हैं। यहां पर बच्चों को पहली बार लिखना सिखाया जाता है। कलम-दवात की पूजा का चलन भी कई हिस्सों में प्रचलित है। पंजाब और हरियाणा में इसे नई फसल से जोड़कर देखा जाता है। बसंत में सरसों फूलती है और पीले-पीले खेतों की खूबसूरती देखते ही बनती है। यह उत्सव भी धूमधाम और मस्ती से मनाया जाता है। पंजाबी गीतों पर भांगड़ा करते लोग, हंसी की फुहारें, भाभी-देवर की नोकझोंक सब एक नया ही माहौल पैदा करती हैं। यहां पतंगें उड़ाने की भी परंपरा है।
पीला रंग भरे जीवन में उमंगपीला रंग सूर्य के प्रकाश का पर्याय होने के साथ ही खुशी, उल्लास, समृद्धि और शक्ति का स्रोत भी होता है। यह रंग आदर, सम्मान और ईमानदारी का प्रतीक भी माना जाता है।
हीलिंग पॉवरयह रंग शरीर में कई बीमारियों को बढ़ने से रोकता है। इससे लिवर, पेट आदि से जुड़ी कई बीमारियां जैसे डायबिटीज, अल्सर, पथरी ठीक हो सकती हैं। इसके पीछे सूर्य की किरणों का प्रभाव होता है।
एनर्जी बूस्टरअमेरिकन कलर थेरिपिस्ट के अनुसार यह रंग आपको पॉजीटिव एनर्जी देता है। साथ ही जिंदगी के प्रति आपके नजरिए को भी बेहतर बनाता है। जब भी आप निराश हों तो सूर्य की रोशनी लें, इससे आप अच्छा महसूस करेंगी। साथ ही कैंडल में साइट्रिक होता है जो अपनी लौ से निकलने वाले धुएं से एनर्जी बूस्टर का काम करता है।
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