जयपुर. साधु-संतों के दबाव को देखते हुए राज्य सरकार ने ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा क्षेत्र में आने वाली 180 खानों को तुरंत प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए हैं। खान विभाग ने इन खानों की लीज अवधि पूरी होने से पहले ही मालिकों को खनन पट्टे समाप्त करने के नोटिस थमा दिए हैं। खान मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे के अनुसार कामां तहसील क्षेत्र की 157 और डीग क्षेत्र की 23 खानों को बंद करने के नोटिस जारी किए गए हैं।
राज्य सरकार ने इन खनन पट्टाधारकों को रजिस्टर्ड डाक से नोटिस भेजे हैं। खान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि डीग व कामां क्षेत्र में 185 खानें चालू हालत में हैं। इनमें से 180 को बंद करने के नोटिस जारी कर दिए गए हैं जबकि दो खनन पट्टाधारकों की लीज ट्रांसफर होने से उनके बदले हुए नाम-पतों के संशोधित नोटिस जारी किए जाएंगे। कामां क्षेत्र में स्थित मेजर मिनरल्स की तीन खानों को बंद करने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति ली जाएगी।
17 खानें राज्य सरकार पहले ही बंद करा चुकी है। बाकी 14 खानें अन्य कारणों से पहले ही बंद कर दी गई। ब्रज चौरासी परिक्रमा क्षेत्र की खानों को बंद करने के संबंध में 6 फरवरी को खान मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में फैसला किया गया था। बाद में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी विभाग को इस क्षेत्र की खानें बंद करने की हरी झंडी दे दी थी। उसके बाद आदेश जारी हुए।
35 हजार श्रमिकों पर रोजी-रोटी का संकट
डीग व कामां तहसील क्षेत्र की खानें बंद होने से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े करीब 35 हजार लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो जाएगा।
संत महापड़ाव पर अडिग
अखिल भारतीय चतुर्थ संप्रदाय विरक्त वैष्णव साधु समाज के प्रवक्ता महंत मुनीश्वर दास महात्यागी ने कहा है कि साधु-संतों का 26 फरवरी को राज्य विधानसभा पर महापड़ाव होगा। महापड़ाव की अगुवाई नागा साधु करेंगे। आंदोलनकारी साधु-संतों की मांग है कि राज्य सरकार के इशारे पर ब्रजरक्षक भक्तों पर दर्ज किए झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं, खान मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे और चिकित्सा मंत्री दिगंबर सिंह द्वारा अपमानित करने और खान मंत्री के भ्रष्टाचार की सीबीआई से जांच कराई जाए।
साधु-संतों ने स्वतंत्र ब्रज चौरासी कोस विकास बोर्ड बनाने, खनन से हुई अपूरणीय क्षति के संबंध में राज्य सरकार से श्वेतपत्र जारी करने और धार्मिक मुद्दों पर ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग की है।